Monday, September 21, 2009

वेदान्त का सूक्ष्म शरीर ही है डीएनए

वेदान्त दर्शन में जिसे सूक्ष्म शरीर कहा गया है क्या वह असल में डीएनए की ओर ही संकेत है। कहा गया है कि सूक्ष्म शरीर मन, बुद्धि और अहंकार से मिलकर बना है। डीएनए के भी दो मुख्य गुण हैं, जिनकी वजह से उसे जीवन का आधार कहा जाता है- सेंस और एंटी सेंस। सेंस ही बुद्धि है और एंटीसेंस प्रतिक्रिया यानी अहंकार।
इस संबंध में विस्तार से पढ़ें-http://sudhirraghav.blogspot.com/

Monday, September 14, 2009

ज्ञात या अज्ञात

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Friday, September 11, 2009

वैज्ञानिक रहेंगे देश में ही, पैकेज विदेश का

तरुणी गांधी चंडीगढ़ 
इमटेक में बायोटेक्नोलॉजी में डॉक्टरेट कर रहे युवा वैज्ञानिकों पर अब विदेशी कंपनियों की नजर है। पहले जहां विदेशी कंपनियां सिर्फ तकनीक ही खरीदती थीं, अब तकनीक इजाद करने वालों को भी अपने यहां चाहती हैं। वजह यह है कि नई तकनीक को हैंडल करने वालों के अभाव में वह जल्द ही ठप्प हो जाती थी] इसलिए मजबूरी में भी उन्हें यह कदम उठाना पड़ रहा है। अब इमटेक न सिर्फ तकनीक तैयार करेगा बल्कि इसका संबंधित कंपनी को लाइसेंस देने के बाद भी उसे स्पोर्ट करता रहेगा। इसका नतीजा यह है कि तकनीक इजाद करने वाले नौजवान वैज्ञानिकों के लिए भी बेहतर विकल्प पैदा हो रहे हैं। साथ ही उनके लिए देश छोडऩे की बाध्यता नहीं होगी, वे यहीं रह कर विदेशी कंपनी के लिए काम कर सकेंगे। आमतौर पर नौकरी लगने पर वैज्ञानिकों को इंडस्ट्री तीन से चार लाख रुपए वार्षिक पैकेज देती है। विदेशी कंपनियों में अवसरों को देखते हुए इन्हें करीब दुगने तक के पैकेज अपने ही देश में मिलने की उम्मीद है।
अमेरिकी कंपनी से साझेदारी
इमटेक ने हाल ही में अमेरिका न्यूजर्सी की कंपनी नोस्ट्रम(ड्रग कंपनी) के साथ सांझेदारी की है। इमटेक से ड्रग तकनीक का लाइसेंस देने के बाद नोस्ट्रम की भारतीय कंपनी सिमेटरिक इंडिया बायोटेक ने यहां के आठ वैज्ञानिकों को तकनीक आगे बढ़ाने के लिए नियुक्त किया है। इससे पहले कंपनी को कोई भी दवा तकनीक लेने के बाद अधिकाधिक निवेश ड्रग ट्रायल्स में लगाना पड़ता था लेकिन सांझेदारी के बाद इमटेक अब ट्रॉयलस करने में भी मदद कर रहा है, जिसमें एनीमल ट्रॉयल से लेकर सभी स्टेज के ट्रॉयल्स को मूर्तरूप दिया जा रहा है। 
ये हैं नई तकनीक 
हृदय में ब्लड क्लॉट ड्ल्यूट करने वाली दवा तकनीक का लाइसेंस हाल ही में नोस्ट्रम को दिया गया है। अब सांझेदारी के तहत नोस्ट्रम की भारतीय कंपनी सिमेटरीक इंडिया बायोटेक ने इमटेक के आठ वैज्ञानिकों को नियुक्त किया है। ये वैज्ञानिक इस तकनीक के सभी ट्रॉयल्स करने के बाद बाजार में उतारने तक कंपनी की मदद कर रहे हैं।


इस सांझेदारी से इमटेक में ट्रेनिंग ले रहे छात्रों को फायदा हो रहा है। विदेशी कंपनियां हमारे छात्रों व तकनीक में दिलचस्पी दिखा रही हैं। अगर यूटी प्रशासन हमें इंफ्रास्ट्रक्टर बढ़ाने में मदद करे तो यहां के छात्रों व बायोटेक्नोलॉजी विषय को बड़ा स्तर मिलेगा।
-डॉ. गिरीश साहनी, निदेशक, इमटेक

स्त्री और मनुस्मृति

मनुस्मृति काल के समाज के बारे में जो कुछ उपलब्ध है, वह बताता है कि वह जाति और वर्ण में बंधे समाज में पुरुष से दोयम होती चली गई। कुछ श्लोक ऐसे भी हैं जिनमें उस शूद्र के साथ बराबरी पर रखते हुए, उस तरह के व्यवहार की बात कही गई है। हालांकि विद्या के मामले में जो श्लोक हैं, उन्हें कई इतिहासविद क्षेपक मानते हैं। इसके अलावा स्त्री के लिए यौन शुचिता का बोझ अलग से बांधा गया, जिसे ढोते-ढोते न जाने कितनी स्त्रियों ने अग्नी-परीक्षा दी। पत्नी का कब-कब त्याग कर पति दूसरी शादी कर सकता है, इससे संबंधित रोचक श्लोक मनुस्मृति में है-
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Wednesday, September 9, 2009

चंडीगढ़ में किसानों का तांडव


पंजाब के किसानों की यहां आयोजित रैली में आई करीब 5,000 की भीड़ ने मंगलवार को शहर में जम कर तांडव किया। उपद्रव में एक किसान की बस से कुचल कर मौत हो गई जबकि करीब 55 अन्य घायल हो गये। घायलों में एसपी सिटी सहित 45 पुलिसकर्मी शामिल हैं। इनमें से तीन की हालत गंभीर है। भीड़ ने 50 से ज्यादा निजी और सरकारी वाहनों में तोडफ़ोड़ की। 15 गाडिय़ों को आग के हवाले कर दिया।
चंडीगढ़ वालों के लिये मंगलवार का दिन किसी दु:स्वप्न सरीखा साबित हुआ। प्रशासन ने यहां एक साथ तीन-तीन संगठनों को धरना-प्रदर्शन की इजाजत दी जो कानून-व्यवस्था पर भारी पड़ा। दिन में करीब 20 से 25 हजार लोगों की भीड़ यहां जुटी। इनमें से पंजाब के बिजलीकर्मियों और अन्य सरकारी कर्मिंयों की दो रैलियां तो शांतिपूर्वक निपट गईं पर भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में आयोजित किसानों की रैली में आई भीड़ ने जम कर गदर मचाया। ये किसान बिजली बोर्ड के विघटन का विरोध कर रहे थे।
सेक्टर 16 से सेक्टर 23 के चौराहे के बीच सड़क पर किसानों ने सभा की। इसके बाद वे राजभवन की ओर बढऩे लगे। मौके पर तैनात चंडीगढ़ पुलिस, पंजाब पुलिस, हरियाणा पुलिस और सीआरपी के जवानों ने उन्हंे रोकने की कोशिश की। नाराज किसानों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। शाम चार बजे के आसपास प्रदर्शनकारी किसानों ने सेक्टर 16 और सेक्टर 17 के चौराहे पर चारों ओर से पुलिसवालों को घेर कर हमला कर दिया। पुलिस ने आंसू गैस के गोलों और पानी की तेजधार छोड़ कर उन्हें काबू करने की कोशिश की। कुछ देर में आंसू गैस के गोले और वाटर कैनन में पानी समाप्त हो गया। इसके बाद पुलिसवाले जान बचाकर भाग खड़े हुए। आक्रामक भीड़ ने दूर तक दौड़ा कर उन पर शराब की खाली बोतलों और पत्थरांे से हमला किया। कई पुलिसकर्मियों और मीडियाकर्मी घायल हो गये। पुलिसकर्मियों ने इसके बाद एकजुट होकर किसानों को सेक्टर-25 तक खदेड़ दिया। भागते किसानों ने रास्ते में लोगों को पीटा और तीन कार, 2 ट्रक और 12 बाइकों में आग लगा दी। सेक्टर-22 में कई मकानों में तोडफ़ोड़ की।
शराब पीकर किया उत्पात
शराब के नशे में धुत रैली में शामिल उपद्रवियों ने रिहायसी भवनों पर जमकर पत्थर बरसाएं। पत्थरबाजी के बाद जब पुलिस ने दौड़ाया तो कुछ उपद्रवी सेक्टर-25 की ओर भागे जबकि कुछ ने सेक्टर-22 का रास्ता पकड़ा। सेक्टर-22 जाने वाले उपद्रवियों ने 22ए के कई घरों में तोडफ़ोड़ की। होटल पंकज के पीछे स्थित मकानों पर पत्थर फेंके गए। इसके साथ ही वहां खड़ी गाडिय़ों के शीशे भी तोड़ दिए गए। मध्यमार्ग से लेकर मोहाली को जोडऩे वाली सड़कों पर भीषण जाम लगा था। उपद्रवियों ने घरों के अंदर बैठे लोगों को भी इस हमले में चोटें आईं।

Tuesday, September 8, 2009

हमारे अमीर किसानों पर अमेरिका-कनाडा की नजर

श्रम के बिना अकेली बुद्धि कुछ नहीं कर सकती। अगर मामला खेती-किसानी का हो तो बिना श्रम काम नहीं चलता। भले ही कितना मशीनीकरण हो जाए। यही वजह है कि पश्चिमी देश हरित क्रांति के लिए भारतीय किसानों का मुहं ताक रहे हैं। अनाज की किल्लत महंगाई बढ़ा रही है। अकेले सेर्विस सेक्टर के दम पर समाज नहीं चलता। इससे जीना सुविधाजनक होता है मगर जीने की मूलभूत चीजें बिना खटे पैदा नहीं होतीं। इसके लिए श्रम जरूरी है। यह पश्चिम की समझ में आ रहा है। इसलिए मेहनतकश भारतीय किसानों को अपने यहां बसाने के लिए अमेरिका और कनाडा लालायित हैं। इसके लिए उन्हें अपनी आव्रजन नीति में बदलाव भी मंजूर है। उन्हें किसानों की पढ़ाई-लिखाई और डिग्री भी नहीं देखनी, बस उनकी नजर श्रम पर है। मोहाली में सोमवार को वर्ल्ड वाइड इमिग्रेशन कंसल्टेंसी सर्विसेज की सरपंच मीट में यह जानकारी दी गई कि भारतीय किसानों को अपने यहां बसाने के लिए कनाडा और अमेरिका ने नई इमिग्रेशन नीति तैयार की है। कनाडा सरकार की योजना के तहत वहां कृषि व्यापार क्षेत्र में निवेश के लिए 8 लाख कनेडियन डॉलर की संपत्ति होना जरूरी है। वहां 1.2 लाख कनेडियन डालर निवेश करने पर चार लाख डालर का सरकार ऋण भी देती है, जिसे आसान किस्तों पर लौटाया जा सकता है। इस मीट में पंजाब के राज्यभर से आए 13 सरपंचों ने हिस्सा लिया।

Wednesday, September 2, 2009

पंचकूला में नई शुरुआत, रक्तदान के लिए कैलेंडर

खून को नालियों में बहने से बचाने के लिए पंचकूला में पहल हो चुकी है। जिला प्रशासन की योजना के अनुसार भविष्य में लगने वाले सभी रक्तदान शिविर अब कैलेंडर प्रणाली के तहत लगाए जाएंगे। कैलेंडर का निर्माण स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई रक्त की मांग के हिसाब से प्रतिमाह तैयार किया जाएगा। कैलेंडर प्रणाली द्वारा रक्त एकत्र किए जाने से जहां स्वास्थ्य विभाग की आवश्यकता पूरी होगी, वहीं जिला प्रशासन को उम्मीद है कि इस तरह से वह बहुमूल्य रक्त को नालियों में व्यर्थ बहने से रोक पाने में सफल होगा।
ब्लड ग्रुप के आधार पर समूह विभाजन
प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो स्वास्थ्य विभाग ने प्रति माह करीब 200 यूनिट रक्त की जरूरत बताई है। कैलेंडर प्रणाली में बाकायदा ब्लड ग्रुप के हिसाब से समूह विभाजित किए गए हैं, जिसमें जरूरत के हिसाब से वर्ग बनाए गए हैं। इस कैलेंडर में एेसी धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं को भी सूचिबद्ध किया गया है, जो कि रक्तदान शिविर के आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभाती है। इसके अलावा कैलेंडर में स्वैच्छिक रक्तदाताओं का भी ब्यौरा रखा जाएगा, ताकि आपतकालीन स्थिति में किसी खास रक्त समूह की आवश्यकता हो तो उसे तुरंत उपलब्ध कराया जा सके।
इस तरह होगा विभाजन
जिला प्रशासन की योजना अनुसार स्वास्थ्य विभाग प्रति माह रक्त की जरूरत बताएगा। इस जरूरत को ध्यान में रखते हुए सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं की मदद से बारी-बारी शिविर लगाए जाएंगे, लेकिन ध्यान रखा जाएगा कि मांग के अनुरूप ही रक्त एकत्र हो। यही नहीं, जिस माह में जितने रक्त की आवश्यकता होगी, उसे विभिन्न संस्थाओं में विभाजित कर दिया जाएगा। मसलन, एक महीने में अगर 200 यूनिट रक्त की जरूरत है तो कैलेंडर के हिसाब से चार संस्थाओं को मार्क करके प्रत्येक से 50-५0 यूनिट रक्त एकत्र किया जाएगा।
ग्राम पंचायतों का सहयोग लेंगे
कैलेंडर में सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं के अलावा सरकारी विभागों को भी सूचिबद्ध किया गया है। कैलेंडर में शैक्षणिक संस्थाएं तो शामिल हंै ही, इसके अलावा ग्राम पंचायतों का भी सहयोग लेने पर विचार हो रहा है। जिला रेडक्रास सोसायटी की सचिव विजयलक्ष्मी ने बताया कि सितंबर में लगाए जाने वाल रक्तदान शिविर की अनुमति के लिए जिला प्रशासन के पास फाइल भेज दी गई है। कैलेंडर प्रणाली से जहां रक्त एकत्र करने में आसानी होगी, वहीं उसके खराब होने की संभावनाओं को भी टाला जा सकेगा। एक-दो दिन के भीतर सितंबर माह में लगने वाले रक्तदान शिविर की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
इसलिए कसी थी लगाम
जिला प्रशासन ने जून माह की मासिक बैठक में सिविल सर्जन को निर्देश दिए थे कि अब से मांग के अनुरूप ही रक्त एकत्र किया जाए। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो यह निर्देश इस शिकायत के बाद दिए गए थे कि सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक में एकत्र खून के स्टॉक का सही हिसाब-किताब नहीं रखा जा रहा। रक्तदान शिविर लगाकर खून एकत्र तो कर लिया जाता है, लेकिन जितनी मात्रा में खून एकत्र होता है, उसकी खपत उससे कहीं कम है। खपत न होने के कारण खून खराब हो जाता है, जिसके कारण उसे नालियों में बहा दिया जाता है। इन शिकायतों की जांच के बाद ही जिला प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दे दिए कि जरुरत के हिसाब से ही रक्त एकत्र किया जाएगा। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो स्वास्थ्य विभाग ने इसके खिलाफ कई आपत्तियां दर्ज कराते हुए इस निर्णय को निरस्त करने की मांग की थी।

Tuesday, September 1, 2009

पार्वती जी को पत्नी धर्म का उपदेश - यानी स्त्रियों की स्थिति का विवरण

लोगों की भीड़ से भरी हुई सभा या मेले आदि उत्सवों को दूर से ही त्याग दे। जिस नारी को तीर्थयात्रा का फल पाने की इच्छा हो उसे पति का चरणोदक पीना चाहिए। उसके लिए उसी में सारे तीर्थ और क्षेत्र हैं...
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