Monday, August 31, 2009

चंडीगढ़ में रोड टैक्स बढेगा

चंडीगढ़ में रोड टैक्स बढ़ाया जा सकता है। रजिस्ट्रेशन एंड लाइसंेसिंग अथॉरिटी (आरएलए) में कर्मचारियों को नियुक्त करने वाली रेडक्रास सोसाइटी को कस्टम्स एंड सेंट्रल एक्साइज डिपार्टमेंट की तरफ से मिले नोटिस के बाद आरएलए में आय बढ़ाने के लिए जिन संभावनाओं पर विाचर किया जा रहा है, उनमें से एक प्रस्ताव रोड टैक्स को बढ़ाने का भी है। इसे पंजाब और हरियाणा के बराबर करने का प्रस्ताव है। हालांकि यह फैसला प्रशासन को करना है, लेकिन सेंट्रल एक्साइज डिपार्टमेंट के नोटिस ने रेडक्रास की नींद उड़ा दी है। आरएलए में सेवा देने के लिए रेडक्रॉस की तरफ से 50 से ज्यादा कर्मचारी ठेके पर रखे गए हैं। कई सालों से ये कर्मचारी यहां पर काम कर रहे हैं लेकिन उनके लिए न तो पीएफ और न ही ईएसआई जैसी सुविधाएं हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि अब कस्टम्स एंड सेंट्रल एक्साइज डिपार्टमेंट ने रेडक्रॉस को सर्विस प्रोवाइडर करार दिया है और उसको नोटिस भी जारी कर दिया है। सर्विस प्रोवाइडर को साढ़े 12 प्रतिशत सर्विस टैक्स जमा कराना होता है। इसलिए अब यह बात सामने आ गई है कि यदि रेडक्रास सर्विस प्रोवाइडर है तो फिर कर्मचारियों को ईएसआई व पीएफ आदि की सुविधाएं भी देनी होगी। इसका खर्च हर साल लाखों रुपए में आएगा। रेडक्रॉस सोसाइटी को हर कार्ड की फीस में 50 से 60 रुपए दिए जाते हैं, जिसमें से उनकी तनख्वाह दी जाती है। यदि सर्विस चार्ज लगाए तो इस राशि को बढ़ाना होगा। ऐसा करने से जनता पर बोझ बढ़ेगा। यह विचार किया जा रहा है कि टैक्स बढ़ाकर पंजाब और हरियाणा के बराबर किया जाएगा, तो जो इनकम होगी उससे घाटे को पूरा किया जा सकता है। चंडीगढ़ में एकमुश्त 2 से 5 हजार रुपए के बीच में टैक्स लिया जाता है, वहीं पंजाब में वाहन की कीमत का दो प्रतिशत व हरियाणा में डेढ़ प्रतिशत रोड टैक्स लिया जाता है। जिला उपायुक्त आर के राव ने रोड टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव की पुष्टि की है।

Sunday, August 30, 2009

problems

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दादा जी की संकलन से - भाग ३
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Friday, August 28, 2009

आज की स्त्री

-सुधीर राघव
स्वामी विवेकानन्द कहते हैं समाज में चार तरह की गुलामी होती है। बल की गुलामी, यह जंगल की रीत है, जिसके पास बल है उसकी इच्छा का अन्य सम्मान करते हैं। उसके अनुसार चलते हैं। धन की गुलामी-यह मनुष्यों ने पैदा की है। धन और निर्वाह के लिए लोग दूसरे की इच्छा के अनुसार चलते हैं। तीसरी है मन की गुलामी- यह कुछ लोग अपने वाकचातुर्य से पैदा करते हैं। यह गुलामी सबसे ज्यादा खतरनाक है। मानसिक गुलामी पूरे समाज को सभी तरह की गुलामियों में धकेल देती है। इस तरह के वाकचातुर्य से भरे लोग सबसे निक्रिष्ट कोटी के होते हैं। वे अपनी जानकारियों के आधार पर अन्य से कहते हैं कि मैं तुम से अधिक जानकार हूं इसलिए है भेड़ बकरियो आओ और मेरी पूजा करो। चरण वंदना करो। मैं तुमसे अधिक श्रेष्ठ हूं।
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Tuesday, August 25, 2009

मनसा देवी मंदिर की धर्मशाला में बलात्कार, पुजारी पर मामला दर्ज

मनसा देवी के एक पुजारी के खिलाफ पुलिस ने एक अधेड़ महिला से बलात्कार का मामला दर्ज किया है। बलात्कार मंदिर की लाजवंती धर्मशाला में किया गया। पीडि़त महिला का कहना है कि वह हाईकोर्ट में एक केस के चलते रेवाड़ी से आई थी और अपने एक रिश्तेदार के बताने पर धर्मशाला में ठहरी थी। रिश्तेदार ने यह भी कहा था कि उक्त पुजारी केस में उसकी मदद भी कर सकता है। महिला का कहना है कि रात करीब १२बजे पुजारी ने यह कहकर धर्मशाला में उसके कमरे का दरवाजा खटखटाया कि उसकी वकील से बात हो गई है और जमीन का उसका केस जितवाने की बात उसने कही है। महिला जब अपनी शिकायत लेकर मनसा देवी पुलिस चौकी गई तो उसे भगा दिया गया। बाद में उसने एसपी अमिताभ ढिल्लो से मुलाकात कर आपबीती बताई। इसके बाद पुलिस ने पुजारी पर मामला दर्ज कर लिया। उधर पुजारी संजय शर्मा का कहना है कि मामला झूठा है, महिला ने उससे पैसे मांगे थे, जब उसने इनकार कर दिया तो उसने उसके खिलाफ रेप का झूठा मामला दर्ज करवा दिया।
(हिन्दुस्तान चंडीगढ़ में यह खबर विस्तार से दी गई है)

Monday, August 24, 2009

शिमला जाना सस्ता, आम खाना महंगा

पंचकूला से शिमला का किराया १०० रुपए और देहरादून का १२० रुपए है। अगर आप एक किलो आम खाना चाह रहे हैं तो पूरे १३० रुपए खर्च होंगे। इसी तरह अगर आप को देश की राजधानी दिल्ली जाना हैं तो १४२ रुपए लगते हैं मगर काले अंगूर खाने हों तो एक किलो के २०० रुपए खर्च करने होंगे। इसी तरह केले ३५ से ४० रुपए दर्जन हैं और चंडीगढ़ से अंबाला का किराया २८ रुपए। इसी तरह पपीता ३० रुपए किलो है। यानी अंबाला जाने से पपीता खाना महंगा पड़ जाएगा।

(बढ़ती महंगाई पर पंचकूला से जितेंद्र भरद्वाज की विस्तृत रिपोर्ट आप देख सकते हैं हिन्दुस्तान चंडीगढ़ में।)

Sunday, August 23, 2009

अपना अमरूद जब कनाडा घूमकर आया

जानते हो जी, अपना अमरूद कनाडा घूमकर लौटा है। मगर कैसा हो गया है, यह देखना है तो रिटायर्ड जज गुरनाम सिंह के मोहाली स्थित घर के बगीचे में आइए। यह अमरूद बेर जैसा छोटा हो गया है। काटों तो अंदर से इलाहबादी अमरूद जैसा ही लाल निकलता है। इसे खाओ तो उससे ज्यादा मीठा और खुशुबू ऐसी कि अगर एक भी रखा हो तो पूरे कमरे में अमरूद की ही सुगंध आएगी।
हिन्दुस्तान के चंडीगढ़ संस्करण में छपी खबर के मुताबिक जस्टिस गुरनाम सिंह ने बताया कि कनाडा के एक रिश्तेदार ने उन्हें बीज दिए थे। उन्होंने ये अपने किचन गार्डन में लगा दिए। पहले पौधे उगे तो पता नहीं चला कि यह क्या है। पेड़ भी कोई ज्यादा बड़ा नहीं बना। एक झाड़ जैसा ही रहा। बाद में इस पर छोटे-छोटे फल लगे। तब भी पहंचान में नहीं आया कि क्या है। जब यह फल पके तो इनसे अमरूद की खुशुबू निकली। इन्हे तोड़ कर देखा तो अंदर से लाल अमरूद जैसे ही बीज। खाया तो वही स्वाद और अमरूद से ज्यादा मीठे। तब जाकर पता चला कि अपना अमरूद कनाडा से लौटकर आया है तो कितना क्यूट हो गया।

Saturday, August 22, 2009

मीमांसा के व्याख्या सिद्धांत ज्यादा वैज्ञानिक और सटीक

भारत में शब्दों की व्याख्या के ढाई हजार साल पुराना सिद्धांत मौजूद है लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि इन्हें इस्तेमाल नहीं किया जाता। यहां तक कि हमारी अदालतें भी इन सिद्धांतों से अनभिज्ञ हैं और तथाकथित शिक्षित लोगों को इनकी जानकारी ही नहीं है। वकील अदालतों में क्रैईस और मैक्सेवेल के व्याख्या सिद्धांतों का उल्लेख तो करते हैं लेकिन मीमांसा सिद्धांतों का कभी जिक्र नहीं करते, शायद उन्होंने इसके बारे में कभी सुना भी नहीं होगा, जबकि ये सिद्धांत ज्यादा सटीक, वैज्ञानिक और तर्कसंगत हैं। यह कहना है सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस मार्कंडेय काटजू का। जस्टिस काटजू इससे पूर्व भी मेरठ के एक मामले में बैलगाड़ी खेती का उपकरण है या नहीं, का फैसला कर चुके हैं। उन्होंने मीमांसा सिद्धांतों का प्रयोग करते हुए स्पष्ट किया था कि बैलगाड़ी फसल और सवारियां ढोने में काम आती है इसलिए इसकी खरीद पर सब्सिडी देना उचित है। उन्होंने कहा कि मैक्सवेल के व्याख्या सिद्धांतों का पहला संस्करण 18६5 में प्रकाशित हुआ था जबकि हमारे यहां ये सिद्धांत ढाई हजार वर्षों से मौजूद हैं। उदाहरण के तौर पर कहा जाता है कि 'न कलंजं भक्ष्येते यानी बासी खाना मत खाओ। यही भूमि अधिग्रहण एक्ट की धारा 6 में कहा गया है। इसमें स्पष्ट मनाही है कि समय सीमा बीतने के बाद भू-अधिग्रहण की सूचना प्रकाशित नहीं की जाएगी। जब कानून में स्पष्ट मनाही है तो उसकी व्याख्या कर इसे हां में कैसे बदला जा सकता है। सौ वर्ष पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सर जॉन एज ने बेनीप्रसाद बनाम हरदेयी बाई (१७८2) के केस में इन सिद्धांतों का प्रयोग किया इसके बाद मार्कंडेय काटजू ने इनका प्रयोग किया लेकिन फिर इन सिद्धांतों का इस्तेमाल नहीं हुआ है। ईसा पूर्व छठी शताब्दी में जैमिनी ने अपने मीमांसा सूत्र बनाए और इनकी सबर , कुमारिल भट्ट, प्रभाकर और मंडन मिश्रा ने व्याख्या की। इन सूत्रों को प्रख्यात न्यायविद विज्ञानेश्वर(उत्तर और दक्षिण भारत में लागू हिन्दू लॉ मिताक्षर के लेखक), जिमुत्वहन (बंगाल में लागू हिन्दू लॉ दयाभाग के लेखक), नंदा पंडित (दत्तक मीमांसा लेखक) ने प्रयोग किया है। जब भी मनुस्मृत्ति तथा यज्ञवल्क्य स्मृति में टकराव होता था इन सूत्रों का इस्तेमाल कर इसे दूर कर लिया जाता था।
(दैनिक हिन्दुस्तान में प्रकाशित जस्टिस मार्कंडेय काटजू के व्याख्यान से)

Friday, August 21, 2009

फीस 75 हजार, छात्र 150 और टीचर 1

पंजाब यूनिवर्सिटी के होशियारपुर में छात्रों के साथ अब तक कितना अन्याय हुआ, इसकी दास्तां सुनाने स्वयं भुक्तभोगी छात्र कुलपति के पास पहुंचे। छात्रों के अनुसार एमसीए प्रथम वर्ष में 70, द्वितीय और तृतीय वर्ष में 40-40 छात्र दाखिल हैं। कोर्स की फीस 75 हजार रुपए हैं, लेकिन इन्हें पढ़ाने के लिए केवल एक ही रेगुलर शिक्षक राजेंद्र सिंह हैं। अब यही शिक्षक भी हैं और एचओडी भी। होशियारपुर से आपनी समस्याओं को रखने पहुंचे इन स्टूडेंट्स ने कहा कि पिछले एक महीने से दिन भर में केवल एक ही क्लास लगती है, उसके लिए इन्हें सारा दिन खराब करना पड़ता है। पीयू के चंडीगढ़ कैंपस में कोर्स लगभग आधा कवर कर लिया गया है। ऐसे में पूरी फीस देकर भी परेशान हैं, पढ़ाई से दूर हैं। इतना ही नहीं इन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रीजनल सेंटर में जिन शिक्षकों (रेगुलर के अलोक) को भी पढ़ाने के लिए भेजा गया, वे क्वालिफाइड थे ही नहीं। इसके अलावा बुनियादी सुविधाओं का भी आभाव है। छात्रों का कहना है कि उनके लैब में केवल 2 कंप्यूटर हैं और इंटरनेट भी नहीं हैं। तीन कक्षाएं लगने के लिए क्लासरूम केवल दो ही हैं। कुलपति ने छात्रों को आश्वस्त किया कि मगंलवार तक उनके लिए रेगुलर शिक्षकों की व्यवस्था हो जाएगी।
(यह खबर विस्तार से चित्र सहित हिन्दुस्तान चंडीगढ़ में देखी जा सकती है)

Thursday, August 20, 2009

अचानक ये लाखों तितलियां कहां से आईं

सुधीर राघव
चंडीगढ़ और इसके आसपास के इलाकों में लाखों तितलियों के झुंड पूर्व से पश्चिम की ओर उड़ रहे हैं। ये तितलियां कुछ हरापन लिए पीली सी हैं। सभी एक ही परिवार की दिखती हैं। इतनी बड़ी संख्या को कुछ लोग किसी बड़े अनिष्ट का संकेत भी मान रहे हैं। हालांकि तितली विशेषग्य इस बात से खुश हैं कि ज्यादा तितलियां पर्यावरण बेहतर होने का संकेत हैं। इस तितली के बारे में कीट विग्यानी भी कई रोचक बातें बताते हैं-कैटोप्सिलिया प्य्रेंथे मध्यम आकार की यह तितली पिएरिडे परिवार की है। इस परिवार की 8१ प्रजातियां भारत में पायी जाती हैं। आजकल चंडीगढ़ और इसके आसपास के इलाकों में जो तितलियां उड़ रही हैं वे इन्हीं में से एक हैं। चंडीगढ़ में उड़ रही तितलियां हरापन लिए हुए पीले रंग की हैं। इनके पंखों में कोई निशान भी नहीं है। हलांकि इस परिवार की अन्य प्रजातियों में काले रंग के निशान भी पाये जाते हैं। इनमें नर के पंख चाक जैसा सफेद होते हैं, जबकि मादा हरापन लिए पीले रंग के पंखों वाली है। अंडे से वयस्क बनने तक का इनका जीवन चक्र 2२ से 29 दिन का होता है। एक साल में इनकी 1१ से 12 पीढिय़ां हो जाती हैं। ये मुख्यत: दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य अफ्रीका, साउदी अरब के दक्षिण हिस्सों में और न्यू गुएना में पायी जाती हैं।आजादी से पहले ब्रिगेडियर डब्ल्यू.एच. इ. वेन्स ने तितलियों पर काफी काम किया था, उन्होंने भारत और बर्मा में तितलियों की 14३८ प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की थी। मौजूदा समय में भारत में तितलियों के पांच परिवार बसते हैं। इनकी सैंकड़ों प्रजातियां हैं।पहला परिवार है पैपिलियोनिडे है। दुनिया में इसकी करीब साढ़े 5 सौ प्रजातियां है इनमें भारत में 8४ पायी जाती हैं। ये बड़ी आकार की तथा खूबसूरत होती हैं। इनके पंख काफी चमकीले होते हैं। आपके किचन गार्डन में आकर ये सबसे पहले आपका ध्यान खींचती हैं। न्यम्पेलिडे परिवार दुनियां में तितलियों का सबसे बड़ा परिवार माना जाता है। क्षेत्र के हिसाब से अलग रंग-रूप के चलते इस परिवार की कई हजार प्रजातियां हैं। इनमें 48 प्रजातियां भारत में भी पायी जाती हैं। ये तितलियां मध्यम आकार की होती हैं और अनेक रंगों में मिलती हैं।पिएरिडे परिवार की तितलियां तेज रफ्तार से उडऩे के लिए जानी जाती हैं। आकार मध्यम होता है। भारत में इस परिवार की 8१ प्रजातियां पायी जाती हैं। यह पीले और सफेद रंग की होती हैं तथा कुछ में काले निशान भी होते हैं।रिडीनिडे परिवार की तितलियांये तितलियां आकार में छोटी धातु के रंग की चमकीली होती हैं। इन पर ऐसे ही रंगों के चकत्ते भी रहते हैं। दुनियाभर में इनकी हजार के करीब प्रजातियां हैं, जिनमें 8४ भारत में पायी जाती हैं।ल्यकाईनीडे परिवार तितलियों का दुनिया में दूसरा बड़ा परिवार है। इसकी छह हजार से ज्यादा प्रजातियां हैं। इनकी एक खासीयत यह भी है कि इनके लारवा यानी केटरपिलर अपने भोजन के लिए चींटियों पर निर्भर करते हैं। एक तरह से ये चींटियों की सफाई करते हैं।

नासा ने भी कहा-धरती पर जीवन अन्य ग्रह से आया

नासा ने अपनी साइट पर यह जानकारी डाली है कि धरती पर जीवन कहीं अन्य ग्रह से आया इसकी पुष्टि उसके प्रयोग से हुई है। नासा के डॉ जैसी एलसिला के अनुसार नासा के वैग्यानिकों ने जीवन के मूल तत्व ग्लाइसिन को एक धूमकेतु में पाया है। धरती पर जैव विकास की डार्विन से आगे की थ्योरी लेकर कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के माल्युकुलर जीव वैग्यानी जैम्स ए लेक भी हाजिर हैं।
इस संबंध में विस्तार से पढ़ें- http://sudhirraghav.blogspot.com/

Wednesday, August 19, 2009

अपनी ही पार्टी की लंका फुंकी

जसवंत सिंह का कहना है कि पार्टी ने उन्हें एक झटके में हनुमान से रावण बना दिया। सच में वह पार्टी के हनुमान थे। मगर पार्टी वालों में ही रावण के दरबारी और अहंकारी भी थे। वे उनकी पूंछ में तेल में भीगे पलीते लंबे समय से लपेट रहे थे। आडवाणी के बाद कौन के दावेदारों में जो जंग छिड़ी उसमें जसवंत सिंह बहुतों को रास नहीं आ रहे थे। आडवाणी ने जिन्ना की मजार पर जाकर घुटने टेके तो जसवंत ने जिन्ना का अपनी पुस्तक में गुणगान कर बता दिया कि मैं हूं पार्टी का दूसरा आडवाणी। पर उनकी इस किताब ने दियासलाई का काम किया। पूंछ जली तो पार्टी भी सुलगने लगी। यहां तक कि पुराने सहयोगी बाल ठाकरे तक ने पूछ लिया कि आखिर भाजपा वालों का जिन्ना लगता क्या है?
इस सुलगाव को बुझाने के लिए शिमला के ठंडाते मौसम में मंथन किया गया और फिलहाल फैसला किया गया कि इस पूछ को जिसे विरोधी के खेमे में जाकर जलना था, फिलहाल निकालकर बाहर समुद्र में फेंको। जब बुझ जाएगी तब देखा जाएगा। शिमला पहुंचे जसवंत को बैठक में नहीं आने दिया गया। राजनाथ सिंह ने पहले ही फोन कर दिया-भाई तुम पार्टी से निकाल दिए गए हो। अपने पीएम इन वेटिंग लगता है पार्टी का पूरा बंटाधार होने के बाद ही संन्यास लेंगे। आखिर दो सीट से दो सौ के करीब तक ले जाना का कारनामा उन्होंने किया। अब उनके बाद कोई ऐसा कर दिखाएगा तभी तो वह दूसरा आ़डवाणी कहलाएगा। संघ प्रमुख ने भी कह दिया है कि आडवाणी जी अब नई पीढ़ी को नेतृत्व सौंपो।

अपनी ही पार्टी की लंका फुंकी

जसवंत सिंह का कहना है कि पार्टी ने उन्हें एक झटके में हनुमान से रावण बना दिया। सच में वह पार्टी के हनुमान थे। मगर पार्टी वालों में ही रावण के दरबारी और अहंकारी भी थे। वे उनकी पूंछ में तेल में भीगे पलीते लंबे समय से लपेट रहे थे। आडवाणी के बाद कौन के दावेदारों में जो जंग छिड़ी उसमें जसवंत सिंह बहुतों को रास नहीं आ रहे थे। आडवाणी ने जिन्ना की मजार पर जाकर घुटने टेके तो जसवंत ने जिन्ना का अपनी पुस्तक में गुणगान कर बता दिया कि मैं हूं पार्टी का दूसरा आडवाणी। पर उनकी इस किताब ने दियासलाई का काम किया। पूंछ जली तो पार्टी भी सुलगने लगी। यहां तक कि पुराने सहयोगी बाल ठाकरे तक ने पूछ लिया कि आखिर भाजपा वालों का जिन्ना लगता क्या है?
इस सुलगाव को बुझाने के लिए शिमला के ठंडाते मौसम में मंथन किया गया और फिलहाल फैसला किया गया कि इस पूछ को जिसे विरोधी के खेमे में जाकर जलना था, फिलहाल निकालकर बाहर समुद्र में फेंको। जब बुझ जाएगी तब देखा जाएगा। शिमला पहुंचे जसवंत को बैठक में नहीं आने दिया गया। राजनाथ सिंह ने पहले ही फोन कर दिया-भाई तुम पार्टी से निकाल दिए गए हो। अपने पीएम इन वेटिंग लगता है पार्टी का पूरा बंटाधार होने के बाद ही संन्यास लेंगे। आखिर दो सीट से दो सौ के करीब तक ले जाना का कारनामा उन्होंने किया। अब उनके बाद कोई ऐसा कर दिखाएगा तभी तो वह दूसरा आ़डवाणी कहलाएगा। संघ प्रमुख ने भी कह दिया है कि आडवाणी जी अब नई पीढ़ी को नेतृत्व सौंपो।

जिन्ना के अनुयायी

- सुधीर राघव
बड़ी-बड़ी बातें करते थे
ये कैसे भाजपायी निकले
सावरकर की बात छेड़कर
जिन्ना के अनुयायी निकले।

मस्जिद-मंदिर करवा डाला
बहुतों को यों मरवा डाला
मानवता के कसाई निकले
कैसे ये भाजपायी निकले
जिन्ना के अनुयायी निकले।

माफ करो ऐ, शिया-सुन्नी
ये अबला की छीनें चुन्नी
ये न किसी के भाई निकले
ये कैसे भाजपायी निकले
जिन्ना के अनुयायी निकले।

आडवाणी ने टेका माथा
जसवंत की अपनी गाथा
रामकसम हरजाई निकले
ये कैसे भाजपायी निकले
जिन्ना के अनुयायी निकले।

जिन्ना ने तो सरहद बांटी
करें ये दिल की काटा-काटी
कैसे-कैसे सौदाई निकले
ये कैसे भाजपायी निकले
जिन्ना के अनुयायी निकले।।
(जसवंत सिंह द्वारा जिन्ना को डेविल्स एडवोकेट कार्यक्रम में महान भारतीय बताने के बाद १७ अगस्त को लिखी गई) मूल कविता http://sudhirraghav.blogspot.com/2009/08/blog-post_17.html ब्लॉग पर देखें

जीवन धुन्ध

-ओम राघव
याद करने पर भी, न वे क्षण लौटते न दिन
न वे बातें लौटतीं और न दादा-दादी नाना-नानी
न माता-पिता मौसी-बुआ का प्यार लौटता
लगता था सारा परिवार और रिश्ते बने हैं अपने लिए
याद आती टीस उठती कहां-कब कैसे गया चला
वह समय जो अब इतना दूर है...
विस्तार से पढ़े - http://dadajikablog.blogspot.com/

Tuesday, August 18, 2009

रेंगने लगा है चंडीगढ़

वाहनों के इस शहर में रफ्तार धीमी होती जा रही है। मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम (एमआरटीएस) के लिए राइट्स की सर्वे रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि शहर में पीक आवर्स में वाहनों की औसतन रफ्तार 34 किलोमीटर प्रति घंटा रह गई है जबकि ऑफ पीक अवर्स में यह 37 किमी प्रति घंटा की है । सर्वे के अनुसार 121 ट्रैफिक सिगनल देरी के लिए जिम्मेदार है। तीन पाइंट्स पर ट्रैफिक कंजक्शन देरी के लिए जिम्मेदार है। ट्रैफिक सिगनल पर ट्रैफिक कंजक्शन तीन प्रतिशत देरी के लिए जिम्मेदार है। खराब सड़कों के कारण .७५ और रोड अंडर कंस्ट्रक्शन के कारण .७५ प्रतिशत देरी होती है। पैदल चलने वालों के लिए जगह नहीं है। जबकि बाकी ६३ प्रतिशत सड़क बगैर फुटपाथ के है।

जीव कालचक्र

-ओम राघव
प्रथम बीज अंकुरित हो एक नया चक्कर चलता है,
किसलय पुष्प बन वांड्गमय सुरभित बनता है
प्रसूत फूल या फल से, वह चक्कर चलता है,
कड़ी एक से दूजी, फिर तीसरी जा बनता है।

(विस्तार से पढ़े - http://dadajikablog.blogspot.com/

Sunday, August 16, 2009

जिन्ना के अनुयायी

-सुधीर राघव
बड़ी-बड़ी बातें करते थे
ये कैसे भाजपायी निकले
सावरकर की बात छेड़कर
जिन्ना के अनुयायी निकले।
(यह कविता विस्तार से पढ़ें http://sudhirraghav.blogspot.com/

Saturday, August 15, 2009

चंडीगढ़ में शहीदों के लिए बनेगी गैलरी

नगर निगम सैक्टर 47 के कम्युनिटी सेंटर में देश के लिए जान न्यौछावर करने वाले वीर जवानों की याद में एक गैलरी को बनाने जा रहा है। मेयर कमलेश ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर यह एलान किया। मेयर ने इस मौके पर फायर अकादमी को खोलने का भी एलान किया। इसी तरह शहर के प्रसिद्ध सैक्टर 17 के प्लाजा में लेजर शो शुरू किया जाएगा। इंडस्टिरियल एरिया फेस एक व दो में फूड स्टीट बनाई जाएंगी। सेक्टर 38 में महिला भवन का निर्माण किया जाएगा।

बुजुर्ग पुरुषों को भी बस किराए में छूट

महिलाओं की तरह बुजुर्ग पुरुषों को भी बस किराए में छूट देने के लिए पंजाब के परिवहन विभाग ने कार्यवाही शुरू कर दी है। विभाग ने एक प्रपोजल तैयार किया है, जिसके तहत 6५ वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों से बसों में सफर के दौरान आधा किराया वसूलने का प्रस्ताव है। संबंधित फाइल विभाग के प्रमुख सचिव के पास पहुंच चुकी है और जल्द ही इसे सोशल वेलफेयर विभाग को भेज दिया जाएगा। इसका कारण यह है कि जिस विभाग से संबंधित लोगों को छूट दी जाती है, उसकी भरपाई उसी विभाग को करनी होती है। बुजुर्ग सोशल वेलफेयर विभाग के अधीन आते हैं। इसलिए इस विभाग द्वारा छूट से संबंधित रकम की अदायगी की हामी लेने के लिए प्रपोजल इसे भेज जाना है। सोशल वेलफेयर विभाग ने हामी भर दी तो यह योजना अमल में आ जाएगी और बुजुर्ग पुरुषों को बच्चों व 6५ साल की महिलाओं की तरह आधा टिकट ही लेना पड़ेगा। बुजुर्ग महिलाओं को यह सु्विधा पहले से ही प्राप्त है। जल्द ही सभी सरकारी बसों में दो-दो सीटों पर 'बुजुर्ग पुरुषों के लिए आरक्षित लिख दिया जाएगा।

Friday, August 14, 2009

स्वाइन फ्लू का इलाज आयुर्वेद में

स्वाइन फ्लू का इलाज आयुर्वेद से संभव है। इस ग्यान से ही भारत स्वाइन फ्लू का मुकाबला कर सकता है। यह कहना है द आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर का। उन्होंने साथ ही लोगों से इससे आतंकित न होने के लिए भी कहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारा मन प्रतिरक्षा मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । जब भी हम आतंकित और भय में होते है तो हमारा प्रतिरक्षा का स्तर नीचे चला जाता है । प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास हमे शांत रखने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । अखिल भारतीय आर्युविज्ञान ( एम्स, नई दिल्ली), राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान(नीमहंस, बैंगलुरु) मे स्वतंत्र शोध के अनुभव से पता चलता है कि प्राणायाम और ध्यान जैसे अभ्यास प्रतिरक्षा मे तीन गुना बढ़ोत्तरी करते है । यदि हम इन अभ्यासों और सरल आयुर्वेदिक नुस्खों का समावेश अपने दिनचर्या मे कर ले तो हम स्वाइन फ्लू का आसानी से मुकाबला कर सकते है । स्वाइन फ्लू शरीर मे प्रतिरक्षा के बिगड जाने से आक्रमण करता है । आयुर्वेद सरल और प्रभावशाली उपाय बताता है जो प्रतिरक्षा और प्रतिरोध के निर्माण मे बढ़ौतरी करता है । लक्ष्मी तरु की पत्तियों की चाय, तुलसी, आंवला और अमृत प्रतिरक्षा को बढ़ाने का कार्य करते हैं। इसके अतिरिक्त वैकल्पिक रूप से अदरक और हल्दी के चूर्ण को नींबू के रस या शहद के साथ दिन मे दो बार लिया जा सकता है । वायु वाहित स्वाइन फ्लू वायरस का मुकाबला करने के लिये संबरानी धूप को दिन मे दो बार जलाना चाहिए क्योंकि यह बहुत शक्तिशाली वायुमंडलीय कीटनाश्क होता है।

जन्माष्टमी कब

पिछले कुछ वर्षों से हिन्दू त्योहारों को लेकर एक अजब सी भ्रम की स्थिति पैदा कर दी जाती है। कमोवेश हर त्योहार को लेकर दो तिथियां बताई जाती हैं। इस बार जन्माष्टमी पर भी कुछ मंदिरों में वीरवार को ही मना ली गई जबकि कुछ शुक्रवार को मना रहे हैं। वाकायदा दोनों तिथियों का प्रचार किया जाता है। पुजारियों से पूछा जाए तो उनके अपने तर्क होते हैं। उनका कहना है कि वैष्णव और शैव के लिए अलग-अलग दिन यह त्योहार होता है। कुछ बताते हैं कि यह पंचांग की गड़बड़ है। देश में कई तरह के हिन्दू पंचांग चलते हैं। इनमें से कुछ चंद्र तिथि के अनुरूप ही त्योहार को मानते हैं, जबकि कुछ सूर्योदय के समय जो तिथि होती है उससे आकलन करते हैं। जैसे अष्टमी तिथि वीरवार दोपहर बाद से शुरु हुई और शुक्रवार दोपहर तक थी तो कुछ ने इसे वीरवार को ही माना जबकि सूर्योदय से आकलन करने वालों का तर्क था कि सूर्योदय के समय वीरवार को सप्तमी थी और शुक्रवार को अष्टमी इसलिए इसे शुक्रवार को मनाना चाहिए।
पुजारी और अलग-अलग पंचांग। जहिर है आम आदमी में भ्रम ही पैदा करते हैं। अब सक्रीय मीडिया के दौर में दोनों तरह की जानकारियां तेजी से प्रसारित होती हैं और श्रद्धालु और भ्रमित होते। एक साधारण हिन्दू सभी देवी देवताओं का समान उपासक है। वह यह भी नहीं जान पाता है कि वह शैव है या वैष्णव। ऐसे में विद्वानों और शंकराचार्यों को कोई सर्वसम्मत हल निकालना चाहिए।

Wednesday, August 12, 2009

स्वाइन का सच

स्वाइन फ्लू का खतरा जिस तरह से आया है, उसे लेकर हमारी तैयारी क्या है, यह मुंबई को देखकर कोई भी समझ सकता है। महाराष्ट्र में यह जिस गति से फेल रहा है। उसने निसंस्देह लोगों में डर पैदा किया है। मीडिया का काम वैसे लोगों को यथा स्थिति से अवगत कराना और उनसे संबंधित जानकारियों को अपडेट करना है ताकि लोग किसी भी समस्या का शिकार सिर्फ इसलिए न होते जाएं कि उन्हें उसके बारे में जानकारी नहीं थी। मीडिया में कई बार देखने को मिलता है कि सूचनाओं पर तथाकथित विचार हावी हो जाते हैं। विचार भी ऐसे जो जानकारियों के अभाव में पैदा होते हैं। जब पत्रकार का होमवर्क कम रह जाता है, (जो अक्सर होता है) तो ऐसी स्थिति आती है। ऐसे पत्रकारों के लिए स्वाइन फ्लू से ज्यादा उसका डर बड़ी खबर है। इसमें इलेक्ट्रानिक क्या, प्रिंट मीडिया क्या कोई भी पीछे नहीं है।
स्वाइन फ्लू के संबंध में यह कहा जा सकता है कि यह एक ऐसा जुकाम है जिसका इलाज कराने आप डॉक्टर के पास नहीं पहुंचे तो यह जानलेवा भी हो सकता है। इसके वायरस म्यूटेट होकर इन्सानों के इम्यून सिस्टम को भेदने में कामयाब हो गया है। इसकी संक्रामकता का अंदाजा इसीसे लगाया जा सकता है कि एक व्यक्ति से दूसरे में पहुंचने के लिए इसे कुछ मिली सैकेंड ही चाहिए। यानी एक सैकेंड के कुछ सौंवे हिस्से का समय भी इसके लिए पर्याप्त है। यही वजह है कि यह देश और महाद्वीप की सीमाएं इसके लिए मायने नहीं रख पायीं। यह तेजी से दुनिया में फैल रहा है। लापरवाही कहां - ज्यादातर लोग जुकाम डॉक्टर की सलाह नहीं लेते। वह खुद ही कैमिस्ट से दवाई लेकर या कोई देसी काढ़ा लेकर काम चला लेते हैं। स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण भी जुकाम जैसे ही हैं। ऐसे में अगर रोगी लापरवाह है तो वह कई लोगों को संक्रमण दे सकता है।
एच१एन१ एक चरणबद्ध तरीके से हमला करता है-
पहला चरण - यह रेस्पेरेटरी सिस्टम पर हमला करता है। मरीज में जुकाम-खांसी, गले में सूजन और हल्के बुखार के सामान्य लक्षण नजर आते हैं।
दूसरा चरण -अगर उचित इलाज न मिले तो वायरस तेजी से अपनी संख्या बढ़ाने लगता है। यह ऑक्सीजन ऑब्जर्व करता है। रोगी सांस लेने में कठिनाई महसूस करता है। साथ में उल्टी या दस्त भी मरीज को होने लगते हैं। इस चरण में आकर मरीज को यह आभास होने लगता है कि यह साधारण जुकाम नहीं है।
तीसरा चरण - यदि मरीज चिकित्सक की देख रेख में नहीं पहुंचता तो वायरस फेफड़ों पर असर दिखाने लगता है। इसके चलते ऑक्सीजन की कमी से दिल प्रभावित होता है और घबराहट बढ़ती है। किडनी भी प्रभावित होने लगती है।
चौथा चरण - ऑक्सीजन की कमी के चलते शरीर के महत्त्वपूर्ण अंग काम करना बंद करने लगते हैं। पहले श्वांस नली, फिर फेफड़े, दिल, किडनी और मस्तिष्क का काम रुकने लगता है। हाइपोथीसीज के चलते मरीज की मौत हो जाती है।
यह वायरस सात से दस दिन के भीतर अपने सभी चरण पूरे कर लेता है। इसलिए इसका इलाज जितनी जल्दी शुरू हो उतना अच्छा है। दो-तीन की लापरवाही भी नुकासनदायक हो सकती है।

Tuesday, August 11, 2009

चंडीगढ़ में लेडिज स्पेशल बस

10 अगस्त सोमवार को पहली बार लेडीज स्पेशल बसें शहर में दौड़ीं। खासतौर पर महिलाओं के लिए चालू की गई इन बसों को पहले ट्रायल बेस पर चलाया गया था। इसी कड़ी में आज औपचारिक तौर पर इन बसों को चलाने की घोषणा की गई। चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग(सीटीयू) की तरफ फिलहाल शहर में चार लेडिज स्पेशल बसों को चलाया गया है। सीटीयू के डायरेक्टर एमएल शर्मा के मुताबिक यह बसें सुबह आठ बजे से साढ़े आठ बजे तक चलेंगी। इसी तरह दोपहर को दो बजे से ढाई बजे तक यह बसें चलेंगी। फिलहाल इन बसों का रूट मनीमाजरा से पीजीआई, सेक्टर-42 से पीजीआई और आईएसबीटी-43 से पीजीआई तक का होगा।

Monday, August 10, 2009

चंडीगढ़ में स्काई पार्टियों का मजा इसी महीने से

लोग अब चंडीगढ़ में इसी महीने से स्काई पार्टी का मजा लिया जा सकेगा। कमांडो केटरर्स प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से स्काई पार्टी के आयोजन का प्रस्ताव रखा गया है।

164 फीट की ऊंचाई पर ड्रिंक और डाइनिंग
स्काई इवेंट्स मोबाइल वाहनों पर होंगे इसलिए इनको रजिस्ट्रेशन एंड लाइसेंसिग अथॉरिटी के पास रजिस्टर कराना जरूरी होगा। स्काई पार्टी में भाग लेने वालों को 164 फीट की ऊंचाई पर ड्रिंक व डाइनिंग का लुत्फ कराया जाएगा। देश में अपने तरह का यह पहला प्रयोग होगा। इस तरह के आयोजन से चंडीगढ़ में पर्यटकों को और आकर्षित किया जा सकता है। पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर आपको इस बारे में अधिक जानकारी मिल सकती है।

सुखना पर भी कर सकते हैं पार्टी
शिवालिक होटल के पास सेक्टर-16, परेड ग्राउंड, सुखना लेक, चंडीगढ़ क्लब, रॉक गार्डन, प्रेस क्लब, क्रिकेट स्टेडियम, हॉकी स्टेडियम, पंजाब यूनिवर्सिटी व कलाग्राम को इसके लिए चुना गया है। होटल माउंट व्यू, सीआईआई व आईटी पार्क में भी इसे किया जा सकता है।

क्या है स्काई पार्टी
जर्मन टीवीयू सर्टिफिकेशन के मापदंडों के अनुसार एक टेबल को तैयार किया जाता है। स्काई टेबल को टेलीस्कोपिक हाइड्रोलिक के्रन के जरिए 164 फुट तक की ऊंचाई पर ले जाया जाएगा। आस्ट्रेलिया, बेल्जियम व स्पेन आदि देशों में स्काई पार्टी सफलतापूर्वक चल रही है।

Sunday, August 9, 2009

10 हजार पेड़ लगा चुके हैं बूटे वाले बाबा

बूटे वाले बाबा, दीवान सिंह। दीवान सिंह चंडीगढ़ के ऐसे शख्स हैं जो अब तक दस हजार से अधिक पौधे लगा चुके हैं। वे हर दिन पेड़ लगाते हैं। वे देश के कई हिस्सों में जाकर पेड़ लगा चुके हैं। चंडीगढ़ का कोई धार्मिक स्थल ऐसा नहीं जहां उन्होंने पेड़ न लगाया हो। खास बात यह है कि 65 वर्षीय दीवान सिंह को ब्लड कैंसर था। पीजीआई से जवाब मिलने के बाद उन्होंने यह काम शुरु किया। कुदरत की रहमत ही रही कि अब उनका ब्लड कैंसर भी ठीक हो चुका है। मन की शांति के लिए शुरू किया काम अब उनका शौक बन चुका है।
दीवान पेड़ों के इतने दीवाने हैं कि वे कहते हैं हर पेड़ प्यार चाहता है। किसी पेड़ को अगर आप प्यार से टच करेंगे तो वह खुशी से खिल उठेगा। पंजाबी में छोटे पौधे को बूटा कहा जाता है। इसलिए दीवान सिंह का नाम भी बूटे वाले वाबा पड़ गया है।

Saturday, August 8, 2009

उड़नतस्तरी

सबने देखी उड़नतस्तरी
कुछ बोले, इसमें नर है,
कुछ ने कहा, नहीं स्त्री।
सबने देखी उड़नतस्तरी
कुछ ने देखा, कुछ ने भाला,
सच्चाई से पड़ा न पाला,
टूट सका न अकल का ताला,
(यह कविता पूरी देखें -
http://sudhirraghav.blogspot.com/

Thursday, August 6, 2009

ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट स्कीम में घोटाला

प्रशासन ने पर्यटकों की सहूलियत के लिए चंडीगढ़ में ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट स्कीम शुरू की थी। इस योजना के तहत उन लोगों को जिन के घर साढ़ सात कनाल से बड़े हैं वे खुद को इस योजना के तहत पंजीकृत करवा कर एक या दो कमरे पर्यटकों के लिए रख सकते हैं। इसके लिए पर्यटकों को वे नास्ता और रहने के जगह दे सकते थे और बदले में बहुत ही संक्षिप्त राशि ले सकते थे। दूसरी ओर हुआ ऐसा कि जिन्होंने इस स्कीम के तहत अपने घरों को पंजीकृत कराया, उन्होंने ब्रॉशर तक छपवा लिए और अपने घरों को होटल की तरह नाम दे दिए। वाकायदा एक कमरे का नौ सौ रुपए प्रतिदिन के हिसाब से किराया वसूला जाने लगा। अब प्रशासन को शिकायत मिली तो वह सक्रीय हुआ। शिकायत करने वालों ने ब्रॉशर गृहसचिव तक पहुंचा दिया। अब इस स्कीम के तहत सभी घरों का ऑडिट होगा।

Wednesday, August 5, 2009

चंडीगढ़ बनने का गवाह एक पीपल


चंडीगढ़ के निर्माण का गवाह एक पीपल का पेड़ भी है। यह पेड़ ढाई सौ साल पुराना है। सेक्टर-नौ में स्थित इस पीपल के पेड़ के पास ही पंडित जवाहर लाल नेहरू ने शहर की नींव रखी थी। आज जहां सेक्टर ९ है वहां पहले कालीगर्द गांव होता था। अब इस पेड़ के पास निगम का एक बड़ा पार्क है और यह ठीक कार्मल स्कूल के पीछे है। इस पेड़ की १४ शाखाएं हैं। मुख्य तने की परिधी करीब नौ मीटर है। इसकी छतरी चालीस मीटर की है।

धरती पर जीवन कहां से आया

धरती पर जीवन किस ग्रह से आया इसके संकेत हमारे वेद और पुराण में मिलते हैं। सृष्टि के निर्माण की कथाएं हालांकि काफी समय बाद कलमबद्ध हुईं मगर इनमें संकेत हैं, जो कई रहस्य खोलते हैं। इस संबंध में विस्तार से पढ़े-
http://sudhirraghav.blogspot.com/

Tuesday, August 4, 2009

भारत दर्शन में चंडीगढ़

अल्पना जी ने चंडीगढ़ के बारे में काफी अच्छा लिखा है, पढ़ें -

http://bharatparytan.blogspot.com

उद्बोधन-२

-ओम राघव
जहां भी देखें और सुनें, भ्रष्टाचार दिखाई देता,
आदर्शों का शिरोमणि देश, पतित दिखाई देता।
आपाधापी दिन-रात लगी, है मृषित जनता सारी,
दुर्भाव न जब-तक बदलेंगे, दुख पाये मानवता सारी।
जो बोना वही काटना है, सत्य सनातन सत्य है ये,
आप्त वचन ये ऋषियों के, हर समय हर जगह सत्य है ये।
http://dadajikablog।blogspot.com/

घर में अकेली महिला की करंट लगाकर हत्या

चंडीगढ़ के सेक्टर ४२ स्थित एसबीआई कॉलोनी में एक महिला की मुंह में बिजली की तार ठूंस कर हत्या कर दी गई। महिला के हाथ-पांव बंधे हुए थे। पुलिस को शक है कि बलात्कार के उद्देश्य से महिला की हत्या की गई। दूध वाले पर भी शक की सूई घूम रही है। महिला के पति कृष्णकुमार सोमवार को सुबह साढ़े नौ बजे बैंक के लिए निकले। उनकी पत्नी संतोष उम्र ५२ वर्ष घर पर अकेली ही थी। पुलिस का मानना है कि आरोपी जान-पहचान वाला ही रहा होगा। महिला का शव विस्तर पर पाया गया। उसके हाथ-पैर बंधे हुए थे। मुंह में कूलर की नंगी तार ठूंसी हुई थी। (यह खबर विस्तार से हिन्दुस्तान चंडीगढ़ के मंगलवार के अंक में विस्तार से देखी जा सकती है)

Monday, August 3, 2009

तीन पग में विष्णु ने कैसे नापी धरती

कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने तीन पग में यह धरती नापी थी। ऋग्वेद में यह संकेत इस तरह मिलता है कि भगवान विष्णु तीन चरण में यह धरती बसाई। इस संबंध में विस्तार से पढ़ें -
http://sudhirraghav.blogspot.com/

रूढ़ियों ने स्त्री से आजादी छीनी, लौटा रहा है बाजार

-सुधीर राघव
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हमारे सरोकार
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता। प्राचीन भारत में आर्य लोगों की जो पहचान स्त्रियों को आदर देने के लिए मिलती है, ऐसी विश्व के दूसरे समुदायों में नहीं दिखती। हमारे वेद और प्राचीन ग्रंथ बताते हैं कि आर्यों ने उस समय स्त्रियों का सम्पति का अधिकार मान्य किया था और उन्हें पूर्ण स्वतंत्रता दी थी। यहां तक कि वे वर अपनी मर्जी से चुन सकती थीं। इसी प्रथा को स्वयंवर का नाम दिया गया। हालांकि रामायण और महाभारत काल में इस प्रथा में पिता की शर्तें भी जुड़ने लगी थीं। शायद इसका उद्देश्य एक निश्चित योग्यता निर्धारित करना था।
पूर्व मध्यकाल तक स्वयंवर के उल्लेख मिलते हैं। इनमें संयोगिता का स्वयंवर भी शामिल है। इसके बाद स्वयंवर की प्रथा लुप्तप्राय दिखती है। सत्यार्थ प्रकाश में स्वामी दयानन्द कहते हैं कि भारतवर्ष में जब तक स्वयंवर की प्रथा रही वह उन्नति करता रहा, जैसे ही यह खत्म हुई, हमारा पतन शुरू हो गया। इस तरह स्त्रियों की आजादी ही किसी समाज की खुशहाली तय करती है। रूढ़ियों ने उससे यह आजादी छीन ली और तलवार के जोर पर समाज पुरुष प्रधान हो गया।
अब यह प्रथा अचानक चर्चा में आई है, राखी सावंत के स्वयंवर के रूप में। पर यह स्वयंवर क्या अपने किसी सामाजिक सरोकार के लिए जाना जाएगा, या टीआरपी आधारित बाजार में निर्माताओं और कारोबार से जुड़े लोगों की विग्यापनी कमाई के लिए ही चर्चित रहेगा। राखी इस स्वयंवर से सचमुच अपने लिए वर चुनेंगी, इस पर भी कोई विश्वास करने को राजी नहीं था। देखने वाली बात यह भी थी कि शो के आयोजकों की कितनी चलती है, बाजार की कितनी चलती है और राखी की अपनी कितनी चलती है। स्वयंवर में सोलह दूल्हे आए। इनमें तेरह इलेमिनेट हुए और तीन फायनल राउंड तक पहुंचे। यह खिल्ली भी उड़ाई गई कि राखी तीनों वरों को चुन सकती है।
अंत भला तो सब भला। राखी ने यीशू की प्रार्थना कर इस स्वयंवर में अपने दूल्हे का फैसला किया। साथ ही पहले उन्होंने उनसे माफी मांगी, जिनका दिल उनके फैसले से टूटने वाला था। अंततः तो उन्होंने इलेश के गले में वरमाला डाल दी।
हरियाणा में जहां खापें शादियां तोड़ने के लिए चर्चित हो रही हैं, वहीं राखी स्वयंवर अपने पीछे संदेश छोड़कर जा रहा है कि अब बाजार स्त्री के साथ है। हमारी रूढ़ियों ने उससे जो आजादी छीनी, अब बाजार उसे लोटा रहा है। ग्याहरवीं सदी की संयोगिता के बाद इक्कसीवीं सदी के पहले दशक का राखी स्वयंवर भी लगता है याद किया जाता रहेगा।
(हिन्दुस्तान चंडीगढ़ के सोमवार के अंक में प्रकाशित)

विचार

-ओम राघव
जहॉं भी देखें-सुनें, क्रोध-काम का गरल दिखाई दे,
दुख जीवों का बांट सके, वह दीन न कहीं दिखाई दे,।
वर्गों में बंटे इस विश्व का ढांचा बिगड़ रहा है
पैदा कर उन्माद विश्व की बाहं मरोड़ रहा है।
अर्थहीन- अर्थवान का कैसे हो सामंजस्य
दो किनारे एक नदी के मिलें न कभी सहर्ष।
-विस्तार से देखे - http://dadajikablog.blogspot.com/

Sunday, August 2, 2009

पीयू में रैगिंग

पंजाब यूनिवर्सिटी के ब्वायज होस्टल नं. दो की पार्किंग में शुक्रवार रात ११ बजे रेगिंग होने की खबर है। इस मामले में यूनिवर्सिटी की एंटी रैगिंग कमेटी ने पुलिस में डीडीआर दर्ज करा दी है। कश्मीर से आए पीडि़त छात्र अनिरुद्ध का कहना है कि उससे पहले पूरा परिचय हिन्दी में देने को कहा गया। हिन्दी उसे आती नहीं है। इस पर उससे कहा गया कि चलो मेंरे कान का दर्द ठीक करो। अनिरुद्ध ने कहा कि यह भी उसे नहीं आता। इस पर पार्किंग से आगे वाले हिस्से में जाकर मच्छर मारने को कहा गया और धमकी दी गई कि ऐसा न करने पर उसे फेन्टम बनकर दिखाना होगा। फेन्टम यानी पहले अपने सभी कपड़े सबके सामने उतारने होंगे फिर पेंट पर ऊपर से चड्डी पहननी होगी। फेन्टम बनकर उसे पूरे कैम्पस में घूमना होगा।
आरोपी छात्र की भी शिनाख्त कर ली गई है। उसका नाम सौरव नांदल बताया जा रहा है और बताया जाता है कि घटना के तूल पकड़ने पर वहा रोहतक भाग गया। ( इस संबंध में विस्तार से खबर हिन्दुस्तान चंडीगढ़ के रविवार के अंक में देखी जा सकती है)

Saturday, August 1, 2009

क्या धरती पर जीवन बसाने के दो अलग-अलग मिशन थे

-सुधीर राघव
हालंकि चारों वेदों से भी इसके पर्याप्त संकेत मिलते हैं कि जीवन किसी अन्य ग्रह से आया मगर यहां हमने चर्चा पुराणों से शुरू की है। क्या धरती पर जीवन बसाने को दो अलग-अलग मिशन थे और दोनों में प्रतिद्वंद्वता थी। इस संबंध में विस्तार से पढ़ें-
http://sudhirraghav.blogspot.com/