Monday, August 31, 2009
चंडीगढ़ में रोड टैक्स बढेगा
Sunday, August 30, 2009
Friday, August 28, 2009
आज की स्त्री
स्वामी विवेकानन्द कहते हैं समाज में चार तरह की गुलामी होती है। बल की गुलामी, यह जंगल की रीत है, जिसके पास बल है उसकी इच्छा का अन्य सम्मान करते हैं। उसके अनुसार चलते हैं। धन की गुलामी-यह मनुष्यों ने पैदा की है। धन और निर्वाह के लिए लोग दूसरे की इच्छा के अनुसार चलते हैं। तीसरी है मन की गुलामी- यह कुछ लोग अपने वाकचातुर्य से पैदा करते हैं। यह गुलामी सबसे ज्यादा खतरनाक है। मानसिक गुलामी पूरे समाज को सभी तरह की गुलामियों में धकेल देती है। इस तरह के वाकचातुर्य से भरे लोग सबसे निक्रिष्ट कोटी के होते हैं। वे अपनी जानकारियों के आधार पर अन्य से कहते हैं कि मैं तुम से अधिक जानकार हूं इसलिए है भेड़ बकरियो आओ और मेरी पूजा करो। चरण वंदना करो। मैं तुमसे अधिक श्रेष्ठ हूं।
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Tuesday, August 25, 2009
मनसा देवी मंदिर की धर्मशाला में बलात्कार, पुजारी पर मामला दर्ज
(हिन्दुस्तान चंडीगढ़ में यह खबर विस्तार से दी गई है)
Monday, August 24, 2009
शिमला जाना सस्ता, आम खाना महंगा
(बढ़ती महंगाई पर पंचकूला से जितेंद्र भरद्वाज की विस्तृत रिपोर्ट आप देख सकते हैं हिन्दुस्तान चंडीगढ़ में।)
Sunday, August 23, 2009
अपना अमरूद जब कनाडा घूमकर आया
हिन्दुस्तान के चंडीगढ़ संस्करण में छपी खबर के मुताबिक जस्टिस गुरनाम सिंह ने बताया कि कनाडा के एक रिश्तेदार ने उन्हें बीज दिए थे। उन्होंने ये अपने किचन गार्डन में लगा दिए। पहले पौधे उगे तो पता नहीं चला कि यह क्या है। पेड़ भी कोई ज्यादा बड़ा नहीं बना। एक झाड़ जैसा ही रहा। बाद में इस पर छोटे-छोटे फल लगे। तब भी पहंचान में नहीं आया कि क्या है। जब यह फल पके तो इनसे अमरूद की खुशुबू निकली। इन्हे तोड़ कर देखा तो अंदर से लाल अमरूद जैसे ही बीज। खाया तो वही स्वाद और अमरूद से ज्यादा मीठे। तब जाकर पता चला कि अपना अमरूद कनाडा से लौटकर आया है तो कितना क्यूट हो गया।
Saturday, August 22, 2009
मीमांसा के व्याख्या सिद्धांत ज्यादा वैज्ञानिक और सटीक
(दैनिक हिन्दुस्तान में प्रकाशित जस्टिस मार्कंडेय काटजू के व्याख्यान से)
Friday, August 21, 2009
फीस 75 हजार, छात्र 150 और टीचर 1
(यह खबर विस्तार से चित्र सहित हिन्दुस्तान चंडीगढ़ में देखी जा सकती है)
Thursday, August 20, 2009
अचानक ये लाखों तितलियां कहां से आईं
चंडीगढ़ और इसके आसपास के इलाकों में लाखों तितलियों के झुंड पूर्व से पश्चिम की ओर उड़ रहे हैं। ये तितलियां कुछ हरापन लिए पीली सी हैं। सभी एक ही परिवार की दिखती हैं। इतनी बड़ी संख्या को कुछ लोग किसी बड़े अनिष्ट का संकेत भी मान रहे हैं। हालांकि तितली विशेषग्य इस बात से खुश हैं कि ज्यादा तितलियां पर्यावरण बेहतर होने का संकेत हैं। इस तितली के बारे में कीट विग्यानी भी कई रोचक बातें बताते हैं-कैटोप्सिलिया प्य्रेंथे मध्यम आकार की यह तितली पिएरिडे परिवार की है। इस परिवार की 8१ प्रजातियां भारत में पायी जाती हैं। आजकल चंडीगढ़ और इसके आसपास के इलाकों में जो तितलियां उड़ रही हैं वे इन्हीं में से एक हैं। चंडीगढ़ में उड़ रही तितलियां हरापन लिए हुए पीले रंग की हैं। इनके पंखों में कोई निशान भी नहीं है। हलांकि इस परिवार की अन्य प्रजातियों में काले रंग के निशान भी पाये जाते हैं। इनमें नर के पंख चाक जैसा सफेद होते हैं, जबकि मादा हरापन लिए पीले रंग के पंखों वाली है। अंडे से वयस्क बनने तक का इनका जीवन चक्र 2२ से 29 दिन का होता है। एक साल में इनकी 1१ से 12 पीढिय़ां हो जाती हैं। ये मुख्यत: दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य अफ्रीका, साउदी अरब के दक्षिण हिस्सों में और न्यू गुएना में पायी जाती हैं।आजादी से पहले ब्रिगेडियर डब्ल्यू.एच. इ. वेन्स ने तितलियों पर काफी काम किया था, उन्होंने भारत और बर्मा में तितलियों की 14३८ प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की थी। मौजूदा समय में भारत में तितलियों के पांच परिवार बसते हैं। इनकी सैंकड़ों प्रजातियां हैं।पहला परिवार है पैपिलियोनिडे है। दुनिया में इसकी करीब साढ़े 5 सौ प्रजातियां है इनमें भारत में 8४ पायी जाती हैं। ये बड़ी आकार की तथा खूबसूरत होती हैं। इनके पंख काफी चमकीले होते हैं। आपके किचन गार्डन में आकर ये सबसे पहले आपका ध्यान खींचती हैं। न्यम्पेलिडे परिवार दुनियां में तितलियों का सबसे बड़ा परिवार माना जाता है। क्षेत्र के हिसाब से अलग रंग-रूप के चलते इस परिवार की कई हजार प्रजातियां हैं। इनमें 48 प्रजातियां भारत में भी पायी जाती हैं। ये तितलियां मध्यम आकार की होती हैं और अनेक रंगों में मिलती हैं।पिएरिडे परिवार की तितलियां तेज रफ्तार से उडऩे के लिए जानी जाती हैं। आकार मध्यम होता है। भारत में इस परिवार की 8१ प्रजातियां पायी जाती हैं। यह पीले और सफेद रंग की होती हैं तथा कुछ में काले निशान भी होते हैं।रिडीनिडे परिवार की तितलियांये तितलियां आकार में छोटी धातु के रंग की चमकीली होती हैं। इन पर ऐसे ही रंगों के चकत्ते भी रहते हैं। दुनियाभर में इनकी हजार के करीब प्रजातियां हैं, जिनमें 8४ भारत में पायी जाती हैं।ल्यकाईनीडे परिवार तितलियों का दुनिया में दूसरा बड़ा परिवार है। इसकी छह हजार से ज्यादा प्रजातियां हैं। इनकी एक खासीयत यह भी है कि इनके लारवा यानी केटरपिलर अपने भोजन के लिए चींटियों पर निर्भर करते हैं। एक तरह से ये चींटियों की सफाई करते हैं।
नासा ने भी कहा-धरती पर जीवन अन्य ग्रह से आया
इस संबंध में विस्तार से पढ़ें- http://sudhirraghav.blogspot.com/
Wednesday, August 19, 2009
अपनी ही पार्टी की लंका फुंकी
इस सुलगाव को बुझाने के लिए शिमला के ठंडाते मौसम में मंथन किया गया और फिलहाल फैसला किया गया कि इस पूछ को जिसे विरोधी के खेमे में जाकर जलना था, फिलहाल निकालकर बाहर समुद्र में फेंको। जब बुझ जाएगी तब देखा जाएगा। शिमला पहुंचे जसवंत को बैठक में नहीं आने दिया गया। राजनाथ सिंह ने पहले ही फोन कर दिया-भाई तुम पार्टी से निकाल दिए गए हो। अपने पीएम इन वेटिंग लगता है पार्टी का पूरा बंटाधार होने के बाद ही संन्यास लेंगे। आखिर दो सीट से दो सौ के करीब तक ले जाना का कारनामा उन्होंने किया। अब उनके बाद कोई ऐसा कर दिखाएगा तभी तो वह दूसरा आ़डवाणी कहलाएगा। संघ प्रमुख ने भी कह दिया है कि आडवाणी जी अब नई पीढ़ी को नेतृत्व सौंपो।
अपनी ही पार्टी की लंका फुंकी
इस सुलगाव को बुझाने के लिए शिमला के ठंडाते मौसम में मंथन किया गया और फिलहाल फैसला किया गया कि इस पूछ को जिसे विरोधी के खेमे में जाकर जलना था, फिलहाल निकालकर बाहर समुद्र में फेंको। जब बुझ जाएगी तब देखा जाएगा। शिमला पहुंचे जसवंत को बैठक में नहीं आने दिया गया। राजनाथ सिंह ने पहले ही फोन कर दिया-भाई तुम पार्टी से निकाल दिए गए हो। अपने पीएम इन वेटिंग लगता है पार्टी का पूरा बंटाधार होने के बाद ही संन्यास लेंगे। आखिर दो सीट से दो सौ के करीब तक ले जाना का कारनामा उन्होंने किया। अब उनके बाद कोई ऐसा कर दिखाएगा तभी तो वह दूसरा आ़डवाणी कहलाएगा। संघ प्रमुख ने भी कह दिया है कि आडवाणी जी अब नई पीढ़ी को नेतृत्व सौंपो।
जिन्ना के अनुयायी
बड़ी-बड़ी बातें करते थे
ये कैसे भाजपायी निकले
सावरकर की बात छेड़कर
जिन्ना के अनुयायी निकले।
मस्जिद-मंदिर करवा डाला
बहुतों को यों मरवा डाला
मानवता के कसाई निकले
कैसे ये भाजपायी निकले
जिन्ना के अनुयायी निकले।
माफ करो ऐ, शिया-सुन्नी
ये अबला की छीनें चुन्नी
ये न किसी के भाई निकले
ये कैसे भाजपायी निकले
जिन्ना के अनुयायी निकले।
आडवाणी ने टेका माथा
जसवंत की अपनी गाथा
रामकसम हरजाई निकले
ये कैसे भाजपायी निकले
जिन्ना के अनुयायी निकले।
जिन्ना ने तो सरहद बांटी
करें ये दिल की काटा-काटी
कैसे-कैसे सौदाई निकले
ये कैसे भाजपायी निकले
जिन्ना के अनुयायी निकले।।
(जसवंत सिंह द्वारा जिन्ना को डेविल्स एडवोकेट कार्यक्रम में महान भारतीय बताने के बाद १७ अगस्त को लिखी गई) मूल कविता http://sudhirraghav.blogspot.com/2009/08/blog-post_17.html ब्लॉग पर देखें
जीवन धुन्ध
याद करने पर भी, न वे क्षण लौटते न दिन
न वे बातें लौटतीं और न दादा-दादी नाना-नानी
न माता-पिता मौसी-बुआ का प्यार लौटता
लगता था सारा परिवार और रिश्ते बने हैं अपने लिए
याद आती टीस उठती कहां-कब कैसे गया चला
वह समय जो अब इतना दूर है...
विस्तार से पढ़े - http://dadajikablog.blogspot.com/
Tuesday, August 18, 2009
रेंगने लगा है चंडीगढ़
जीव कालचक्र
प्रथम बीज अंकुरित हो एक नया चक्कर चलता है,
किसलय पुष्प बन वांड्गमय सुरभित बनता है
प्रसूत फूल या फल से, वह चक्कर चलता है,
कड़ी एक से दूजी, फिर तीसरी जा बनता है।
(विस्तार से पढ़े - http://dadajikablog.blogspot.com/
Sunday, August 16, 2009
जिन्ना के अनुयायी
बड़ी-बड़ी बातें करते थे
ये कैसे भाजपायी निकले
सावरकर की बात छेड़कर
जिन्ना के अनुयायी निकले।
(यह कविता विस्तार से पढ़ें http://sudhirraghav.blogspot.com/
Saturday, August 15, 2009
चंडीगढ़ में शहीदों के लिए बनेगी गैलरी
बुजुर्ग पुरुषों को भी बस किराए में छूट
Friday, August 14, 2009
स्वाइन फ्लू का इलाज आयुर्वेद में
जन्माष्टमी कब
पिछले कुछ वर्षों से हिन्दू त्योहारों को लेकर एक अजब सी भ्रम की स्थिति पैदा कर दी जाती है। कमोवेश हर त्योहार को लेकर दो तिथियां बताई जाती हैं। इस बार जन्माष्टमी पर भी कुछ मंदिरों में वीरवार को ही मना ली गई जबकि कुछ शुक्रवार को मना रहे हैं। वाकायदा दोनों तिथियों का प्रचार किया जाता है। पुजारियों से पूछा जाए तो उनके अपने तर्क होते हैं। उनका कहना है कि वैष्णव और शैव के लिए अलग-अलग दिन यह त्योहार होता है। कुछ बताते हैं कि यह पंचांग की गड़बड़ है। देश में कई तरह के हिन्दू पंचांग चलते हैं। इनमें से कुछ चंद्र तिथि के अनुरूप ही त्योहार को मानते हैं, जबकि कुछ सूर्योदय के समय जो तिथि होती है उससे आकलन करते हैं। जैसे अष्टमी तिथि वीरवार दोपहर बाद से शुरु हुई और शुक्रवार दोपहर तक थी तो कुछ ने इसे वीरवार को ही माना जबकि सूर्योदय से आकलन करने वालों का तर्क था कि सूर्योदय के समय वीरवार को सप्तमी थी और शुक्रवार को अष्टमी इसलिए इसे शुक्रवार को मनाना चाहिए।
पुजारी और अलग-अलग पंचांग। जहिर है आम आदमी में भ्रम ही पैदा करते हैं। अब सक्रीय मीडिया के दौर में दोनों तरह की जानकारियां तेजी से प्रसारित होती हैं और श्रद्धालु और भ्रमित होते। एक साधारण हिन्दू सभी देवी देवताओं का समान उपासक है। वह यह भी नहीं जान पाता है कि वह शैव है या वैष्णव। ऐसे में विद्वानों और शंकराचार्यों को कोई सर्वसम्मत हल निकालना चाहिए।
Wednesday, August 12, 2009
स्वाइन का सच
स्वाइन फ्लू के संबंध में यह कहा जा सकता है कि यह एक ऐसा जुकाम है जिसका इलाज कराने आप डॉक्टर के पास नहीं पहुंचे तो यह जानलेवा भी हो सकता है। इसके वायरस म्यूटेट होकर इन्सानों के इम्यून सिस्टम को भेदने में कामयाब हो गया है। इसकी संक्रामकता का अंदाजा इसीसे लगाया जा सकता है कि एक व्यक्ति से दूसरे में पहुंचने के लिए इसे कुछ मिली सैकेंड ही चाहिए। यानी एक सैकेंड के कुछ सौंवे हिस्से का समय भी इसके लिए पर्याप्त है। यही वजह है कि यह देश और महाद्वीप की सीमाएं इसके लिए मायने नहीं रख पायीं। यह तेजी से दुनिया में फैल रहा है। लापरवाही कहां - ज्यादातर लोग जुकाम डॉक्टर की सलाह नहीं लेते। वह खुद ही कैमिस्ट से दवाई लेकर या कोई देसी काढ़ा लेकर काम चला लेते हैं। स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण भी जुकाम जैसे ही हैं। ऐसे में अगर रोगी लापरवाह है तो वह कई लोगों को संक्रमण दे सकता है।
एच१एन१ एक चरणबद्ध तरीके से हमला करता है-
पहला चरण - यह रेस्पेरेटरी सिस्टम पर हमला करता है। मरीज में जुकाम-खांसी, गले में सूजन और हल्के बुखार के सामान्य लक्षण नजर आते हैं।
दूसरा चरण -अगर उचित इलाज न मिले तो वायरस तेजी से अपनी संख्या बढ़ाने लगता है। यह ऑक्सीजन ऑब्जर्व करता है। रोगी सांस लेने में कठिनाई महसूस करता है। साथ में उल्टी या दस्त भी मरीज को होने लगते हैं। इस चरण में आकर मरीज को यह आभास होने लगता है कि यह साधारण जुकाम नहीं है।
तीसरा चरण - यदि मरीज चिकित्सक की देख रेख में नहीं पहुंचता तो वायरस फेफड़ों पर असर दिखाने लगता है। इसके चलते ऑक्सीजन की कमी से दिल प्रभावित होता है और घबराहट बढ़ती है। किडनी भी प्रभावित होने लगती है।
चौथा चरण - ऑक्सीजन की कमी के चलते शरीर के महत्त्वपूर्ण अंग काम करना बंद करने लगते हैं। पहले श्वांस नली, फिर फेफड़े, दिल, किडनी और मस्तिष्क का काम रुकने लगता है। हाइपोथीसीज के चलते मरीज की मौत हो जाती है।
यह वायरस सात से दस दिन के भीतर अपने सभी चरण पूरे कर लेता है। इसलिए इसका इलाज जितनी जल्दी शुरू हो उतना अच्छा है। दो-तीन की लापरवाही भी नुकासनदायक हो सकती है।
Tuesday, August 11, 2009
चंडीगढ़ में लेडिज स्पेशल बस
Monday, August 10, 2009
चंडीगढ़ में स्काई पार्टियों का मजा इसी महीने से
Sunday, August 9, 2009
10 हजार पेड़ लगा चुके हैं बूटे वाले बाबा
बूटे वाले बाबा, दीवान सिंह। दीवान सिंह चंडीगढ़ के ऐसे शख्स हैं जो अब तक दस हजार से अधिक पौधे लगा चुके हैं। वे हर दिन पेड़ लगाते हैं। वे देश के कई हिस्सों में जाकर पेड़ लगा चुके हैं। चंडीगढ़ का कोई धार्मिक स्थल ऐसा नहीं जहां उन्होंने पेड़ न लगाया हो। खास बात यह है कि 65 वर्षीय दीवान सिंह को ब्लड कैंसर था। पीजीआई से जवाब मिलने के बाद उन्होंने यह काम शुरु किया। कुदरत की रहमत ही रही कि अब उनका ब्लड कैंसर भी ठीक हो चुका है। मन की शांति के लिए शुरू किया काम अब उनका शौक बन चुका है।दीवान पेड़ों के इतने दीवाने हैं कि वे कहते हैं हर पेड़ प्यार चाहता है। किसी पेड़ को अगर आप प्यार से टच करेंगे तो वह खुशी से खिल उठेगा। पंजाबी में छोटे पौधे को बूटा कहा जाता है। इसलिए दीवान सिंह का नाम भी बूटे वाले वाबा पड़ गया है।
Saturday, August 8, 2009
उड़नतस्तरी
कुछ बोले, इसमें नर है,
कुछ ने कहा, नहीं स्त्री।
सबने देखी उड़नतस्तरी
कुछ ने देखा, कुछ ने भाला,
सच्चाई से पड़ा न पाला,
टूट सका न अकल का ताला,
(यह कविता पूरी देखें -
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Thursday, August 6, 2009
ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट स्कीम में घोटाला
Wednesday, August 5, 2009
चंडीगढ़ बनने का गवाह एक पीपल

चंडीगढ़ के निर्माण का गवाह एक पीपल का पेड़ भी है। यह पेड़ ढाई सौ साल पुराना है। सेक्टर-नौ में स्थित इस पीपल के पेड़ के पास ही पंडित जवाहर लाल नेहरू ने शहर की नींव रखी थी। आज जहां सेक्टर ९ है वहां पहले कालीगर्द गांव होता था। अब इस पेड़ के पास निगम का एक बड़ा पार्क है और यह ठीक कार्मल स्कूल के पीछे है। इस पेड़ की १४ शाखाएं हैं। मुख्य तने की परिधी करीब नौ मीटर है। इसकी छतरी चालीस मीटर की है।
धरती पर जीवन कहां से आया
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Tuesday, August 4, 2009
उद्बोधन-२
जहां भी देखें और सुनें, भ्रष्टाचार दिखाई देता,
आदर्शों का शिरोमणि देश, पतित दिखाई देता।
आपाधापी दिन-रात लगी, है मृषित जनता सारी,
दुर्भाव न जब-तक बदलेंगे, दुख पाये मानवता सारी।
जो बोना वही काटना है, सत्य सनातन सत्य है ये,
आप्त वचन ये ऋषियों के, हर समय हर जगह सत्य है ये।
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घर में अकेली महिला की करंट लगाकर हत्या
Monday, August 3, 2009
तीन पग में विष्णु ने कैसे नापी धरती
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रूढ़ियों ने स्त्री से आजादी छीनी, लौटा रहा है बाजार
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हमारे सरोकार
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता। प्राचीन भारत में आर्य लोगों की जो पहचान स्त्रियों को आदर देने के लिए मिलती है, ऐसी विश्व के दूसरे समुदायों में नहीं दिखती। हमारे वेद और प्राचीन ग्रंथ बताते हैं कि आर्यों ने उस समय स्त्रियों का सम्पति का अधिकार मान्य किया था और उन्हें पूर्ण स्वतंत्रता दी थी। यहां तक कि वे वर अपनी मर्जी से चुन सकती थीं। इसी प्रथा को स्वयंवर का नाम दिया गया। हालांकि रामायण और महाभारत काल में इस प्रथा में पिता की शर्तें भी जुड़ने लगी थीं। शायद इसका उद्देश्य एक निश्चित योग्यता निर्धारित करना था।
पूर्व मध्यकाल तक स्वयंवर के उल्लेख मिलते हैं। इनमें संयोगिता का स्वयंवर भी शामिल है। इसके बाद स्वयंवर की प्रथा लुप्तप्राय दिखती है। सत्यार्थ प्रकाश में स्वामी दयानन्द कहते हैं कि भारतवर्ष में जब तक स्वयंवर की प्रथा रही वह उन्नति करता रहा, जैसे ही यह खत्म हुई, हमारा पतन शुरू हो गया। इस तरह स्त्रियों की आजादी ही किसी समाज की खुशहाली तय करती है। रूढ़ियों ने उससे यह आजादी छीन ली और तलवार के जोर पर समाज पुरुष प्रधान हो गया।
अब यह प्रथा अचानक चर्चा में आई है, राखी सावंत के स्वयंवर के रूप में। पर यह स्वयंवर क्या अपने किसी सामाजिक सरोकार के लिए जाना जाएगा, या टीआरपी आधारित बाजार में निर्माताओं और कारोबार से जुड़े लोगों की विग्यापनी कमाई के लिए ही चर्चित रहेगा। राखी इस स्वयंवर से सचमुच अपने लिए वर चुनेंगी, इस पर भी कोई विश्वास करने को राजी नहीं था। देखने वाली बात यह भी थी कि शो के आयोजकों की कितनी चलती है, बाजार की कितनी चलती है और राखी की अपनी कितनी चलती है। स्वयंवर में सोलह दूल्हे आए। इनमें तेरह इलेमिनेट हुए और तीन फायनल राउंड तक पहुंचे। यह खिल्ली भी उड़ाई गई कि राखी तीनों वरों को चुन सकती है।
अंत भला तो सब भला। राखी ने यीशू की प्रार्थना कर इस स्वयंवर में अपने दूल्हे का फैसला किया। साथ ही पहले उन्होंने उनसे माफी मांगी, जिनका दिल उनके फैसले से टूटने वाला था। अंततः तो उन्होंने इलेश के गले में वरमाला डाल दी।
हरियाणा में जहां खापें शादियां तोड़ने के लिए चर्चित हो रही हैं, वहीं राखी स्वयंवर अपने पीछे संदेश छोड़कर जा रहा है कि अब बाजार स्त्री के साथ है। हमारी रूढ़ियों ने उससे जो आजादी छीनी, अब बाजार उसे लोटा रहा है। ग्याहरवीं सदी की संयोगिता के बाद इक्कसीवीं सदी के पहले दशक का राखी स्वयंवर भी लगता है याद किया जाता रहेगा।
(हिन्दुस्तान चंडीगढ़ के सोमवार के अंक में प्रकाशित)
विचार
जहॉं भी देखें-सुनें, क्रोध-काम का गरल दिखाई दे,
दुख जीवों का बांट सके, वह दीन न कहीं दिखाई दे,।
वर्गों में बंटे इस विश्व का ढांचा बिगड़ रहा है
पैदा कर उन्माद विश्व की बाहं मरोड़ रहा है।
अर्थहीन- अर्थवान का कैसे हो सामंजस्य
दो किनारे एक नदी के मिलें न कभी सहर्ष।
-विस्तार से देखे - http://dadajikablog.blogspot.com/
Sunday, August 2, 2009
पीयू में रैगिंग
आरोपी छात्र की भी शिनाख्त कर ली गई है। उसका नाम सौरव नांदल बताया जा रहा है और बताया जाता है कि घटना के तूल पकड़ने पर वहा रोहतक भाग गया। ( इस संबंध में विस्तार से खबर हिन्दुस्तान चंडीगढ़ के रविवार के अंक में देखी जा सकती है)
Saturday, August 1, 2009
क्या धरती पर जीवन बसाने के दो अलग-अलग मिशन थे
हालंकि चारों वेदों से भी इसके पर्याप्त संकेत मिलते हैं कि जीवन किसी अन्य ग्रह से आया मगर यहां हमने चर्चा पुराणों से शुरू की है। क्या धरती पर जीवन बसाने को दो अलग-अलग मिशन थे और दोनों में प्रतिद्वंद्वता थी। इस संबंध में विस्तार से पढ़ें-
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