यूटी के बड़े प्रोजेक्ट्स की स्पेशल ऑडिट में गृह मंत्रालय को भारी धांधलियां मिली हैं। राजीव गांधी चंडीगढ़ टेक्नोलॉजी पार्क में आईटी कंपनियों को जमीन देने में घपला किया गया है। अलॉटमेंट मनमाने ढंग से की गई है। स्पेशल ऑडिट गृहमंत्रालय ने इस साल जून में किया था। इसकी रिपोर्ट हाल ही में गृह मंत्रालय में जमा कराई गई है।
रिपोर्ट के अनुसार किसानों को बढ़ते कोर्ट केसों और नेशनल रिहेबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट पॉलिसी के तहत ज्यादा मुआवजा दिया जाना चाहिए। स्पेशल ऑडिट में यह भी सामने आया है कि पाश्र्वनाथ से मिले रुपयों को भी जमा कराने में लापरवाही बरती गई है। सरकारी खजाने में जमा कराने की बजाए इसे सीएचबी और प्रशासन के संयुक्त खाते में जमा कराया गया। यह गलत है। इसके अलावा कम कीमत पर जमीन का प्रत्यक्ष आवंटन, टेंडर की शर्तों का उल्लंघन और बोली की प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए कंसल्टेंट की नियुक्ति में भी नियमों की बड़े स्तर पर अवहेलना की गई है। इसके अलावा निजी खरीददारों और कंपनियों को जमीन बेचने में भी भेदभाव किया गया है।
ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि आईटी पार्क में कंपनियों को जमीन देने में भारी घपला हुआ है। जमीन अलॉटमेंट में एक समान प्रक्रिया को नहीं अपनाया गया है। जमीन की कीमत का निर्धारण भी गलत तरीके से किया गया है और इसमें भी फेरबदल बिना कोई कारण के किए गए हैं।
अलॉटमेंट पालिसी भी निश्चित नहीं है। इस कारण भारी गड़बडिय़ां हुई है। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार जमीन अलॉटमेंट पारदर्शी तरीके से नहीं हुआ है और इसमें मनमानी की बू आ रही है।
इसलिए हुआ स्पेशल ऑडिट
गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने यूटी के बड़े प्रोजेक्टों में धांधली बरते जाने की शिकायतों के बाद ही इनकी स्पेशल ऑडिट के आदेश दिए थे। ऑडिट गृह मंत्रालय के चीफ कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स की देखरेख में हुआ था।
रिपोर्ट के अनुसार किसानों को बढ़ते कोर्ट केसों और नेशनल रिहेबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट पॉलिसी के तहत ज्यादा मुआवजा दिया जाना चाहिए। स्पेशल ऑडिट में यह भी सामने आया है कि पाश्र्वनाथ से मिले रुपयों को भी जमा कराने में लापरवाही बरती गई है। सरकारी खजाने में जमा कराने की बजाए इसे सीएचबी और प्रशासन के संयुक्त खाते में जमा कराया गया। यह गलत है। इसके अलावा कम कीमत पर जमीन का प्रत्यक्ष आवंटन, टेंडर की शर्तों का उल्लंघन और बोली की प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए कंसल्टेंट की नियुक्ति में भी नियमों की बड़े स्तर पर अवहेलना की गई है। इसके अलावा निजी खरीददारों और कंपनियों को जमीन बेचने में भी भेदभाव किया गया है।
ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि आईटी पार्क में कंपनियों को जमीन देने में भारी घपला हुआ है। जमीन अलॉटमेंट में एक समान प्रक्रिया को नहीं अपनाया गया है। जमीन की कीमत का निर्धारण भी गलत तरीके से किया गया है और इसमें भी फेरबदल बिना कोई कारण के किए गए हैं।
अलॉटमेंट पालिसी भी निश्चित नहीं है। इस कारण भारी गड़बडिय़ां हुई है। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार जमीन अलॉटमेंट पारदर्शी तरीके से नहीं हुआ है और इसमें मनमानी की बू आ रही है।
इसलिए हुआ स्पेशल ऑडिट
गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने यूटी के बड़े प्रोजेक्टों में धांधली बरते जाने की शिकायतों के बाद ही इनकी स्पेशल ऑडिट के आदेश दिए थे। ऑडिट गृह मंत्रालय के चीफ कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स की देखरेख में हुआ था।
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