Tuesday, September 8, 2009

हमारे अमीर किसानों पर अमेरिका-कनाडा की नजर

श्रम के बिना अकेली बुद्धि कुछ नहीं कर सकती। अगर मामला खेती-किसानी का हो तो बिना श्रम काम नहीं चलता। भले ही कितना मशीनीकरण हो जाए। यही वजह है कि पश्चिमी देश हरित क्रांति के लिए भारतीय किसानों का मुहं ताक रहे हैं। अनाज की किल्लत महंगाई बढ़ा रही है। अकेले सेर्विस सेक्टर के दम पर समाज नहीं चलता। इससे जीना सुविधाजनक होता है मगर जीने की मूलभूत चीजें बिना खटे पैदा नहीं होतीं। इसके लिए श्रम जरूरी है। यह पश्चिम की समझ में आ रहा है। इसलिए मेहनतकश भारतीय किसानों को अपने यहां बसाने के लिए अमेरिका और कनाडा लालायित हैं। इसके लिए उन्हें अपनी आव्रजन नीति में बदलाव भी मंजूर है। उन्हें किसानों की पढ़ाई-लिखाई और डिग्री भी नहीं देखनी, बस उनकी नजर श्रम पर है। मोहाली में सोमवार को वर्ल्ड वाइड इमिग्रेशन कंसल्टेंसी सर्विसेज की सरपंच मीट में यह जानकारी दी गई कि भारतीय किसानों को अपने यहां बसाने के लिए कनाडा और अमेरिका ने नई इमिग्रेशन नीति तैयार की है। कनाडा सरकार की योजना के तहत वहां कृषि व्यापार क्षेत्र में निवेश के लिए 8 लाख कनेडियन डॉलर की संपत्ति होना जरूरी है। वहां 1.2 लाख कनेडियन डालर निवेश करने पर चार लाख डालर का सरकार ऋण भी देती है, जिसे आसान किस्तों पर लौटाया जा सकता है। इस मीट में पंजाब के राज्यभर से आए 13 सरपंचों ने हिस्सा लिया।

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