खून को नालियों में बहने से बचाने के लिए पंचकूला में पहल हो चुकी है। जिला प्रशासन की योजना के अनुसार भविष्य में लगने वाले सभी रक्तदान शिविर अब कैलेंडर प्रणाली के तहत लगाए जाएंगे। कैलेंडर का निर्माण स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई रक्त की मांग के हिसाब से प्रतिमाह तैयार किया जाएगा। कैलेंडर प्रणाली द्वारा रक्त एकत्र किए जाने से जहां स्वास्थ्य विभाग की आवश्यकता पूरी होगी, वहीं जिला प्रशासन को उम्मीद है कि इस तरह से वह बहुमूल्य रक्त को नालियों में व्यर्थ बहने से रोक पाने में सफल होगा।
ब्लड ग्रुप के आधार पर समूह विभाजन
प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो स्वास्थ्य विभाग ने प्रति माह करीब 200 यूनिट रक्त की जरूरत बताई है। कैलेंडर प्रणाली में बाकायदा ब्लड ग्रुप के हिसाब से समूह विभाजित किए गए हैं, जिसमें जरूरत के हिसाब से वर्ग बनाए गए हैं। इस कैलेंडर में एेसी धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं को भी सूचिबद्ध किया गया है, जो कि रक्तदान शिविर के आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभाती है। इसके अलावा कैलेंडर में स्वैच्छिक रक्तदाताओं का भी ब्यौरा रखा जाएगा, ताकि आपतकालीन स्थिति में किसी खास रक्त समूह की आवश्यकता हो तो उसे तुरंत उपलब्ध कराया जा सके।
इस तरह होगा विभाजन
जिला प्रशासन की योजना अनुसार स्वास्थ्य विभाग प्रति माह रक्त की जरूरत बताएगा। इस जरूरत को ध्यान में रखते हुए सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं की मदद से बारी-बारी शिविर लगाए जाएंगे, लेकिन ध्यान रखा जाएगा कि मांग के अनुरूप ही रक्त एकत्र हो। यही नहीं, जिस माह में जितने रक्त की आवश्यकता होगी, उसे विभिन्न संस्थाओं में विभाजित कर दिया जाएगा। मसलन, एक महीने में अगर 200 यूनिट रक्त की जरूरत है तो कैलेंडर के हिसाब से चार संस्थाओं को मार्क करके प्रत्येक से 50-५0 यूनिट रक्त एकत्र किया जाएगा।
ग्राम पंचायतों का सहयोग लेंगे
कैलेंडर में सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं के अलावा सरकारी विभागों को भी सूचिबद्ध किया गया है। कैलेंडर में शैक्षणिक संस्थाएं तो शामिल हंै ही, इसके अलावा ग्राम पंचायतों का भी सहयोग लेने पर विचार हो रहा है। जिला रेडक्रास सोसायटी की सचिव विजयलक्ष्मी ने बताया कि सितंबर में लगाए जाने वाल रक्तदान शिविर की अनुमति के लिए जिला प्रशासन के पास फाइल भेज दी गई है। कैलेंडर प्रणाली से जहां रक्त एकत्र करने में आसानी होगी, वहीं उसके खराब होने की संभावनाओं को भी टाला जा सकेगा। एक-दो दिन के भीतर सितंबर माह में लगने वाले रक्तदान शिविर की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
इसलिए कसी थी लगाम
जिला प्रशासन ने जून माह की मासिक बैठक में सिविल सर्जन को निर्देश दिए थे कि अब से मांग के अनुरूप ही रक्त एकत्र किया जाए। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो यह निर्देश इस शिकायत के बाद दिए गए थे कि सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक में एकत्र खून के स्टॉक का सही हिसाब-किताब नहीं रखा जा रहा। रक्तदान शिविर लगाकर खून एकत्र तो कर लिया जाता है, लेकिन जितनी मात्रा में खून एकत्र होता है, उसकी खपत उससे कहीं कम है। खपत न होने के कारण खून खराब हो जाता है, जिसके कारण उसे नालियों में बहा दिया जाता है। इन शिकायतों की जांच के बाद ही जिला प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दे दिए कि जरुरत के हिसाब से ही रक्त एकत्र किया जाएगा। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो स्वास्थ्य विभाग ने इसके खिलाफ कई आपत्तियां दर्ज कराते हुए इस निर्णय को निरस्त करने की मांग की थी।
Wednesday, September 2, 2009
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