सबने देखी उड़नतस्तरी
कुछ बोले, इसमें नर है,
कुछ ने कहा, नहीं स्त्री।
सबने देखी उड़नतस्तरी
कुछ ने देखा, कुछ ने भाला,
सच्चाई से पड़ा न पाला,
टूट सका न अकल का ताला,
(यह कविता पूरी देखें -
http://sudhirraghav.blogspot.com/
Saturday, August 8, 2009
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