-ओम राघव
सुन पोते का फोन, मन दादी का भर गया
घर के सारे लोगों में अनन्द कर गया।
वाणी तोतली दादी में नवप्राण भर गई
माहोल सारे घर का शीतल यान कर गई।
याद पोते की दादी को खूब सताती है,
जब आता नहीं फोन, तब उसे रुलाती है।
(यह पूरी कविता व अन्य कविताएं आप पढ़ सकते हैं-
http://dadajikablog.blogspot.com/
Sunday, July 26, 2009
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