Saturday, July 11, 2009

बच्चा चुराने का अजीब है यह ढंग

चंडीगढ़ की कालोनी नंबर पांच में गुरुवार को एक महिला पहुंची। उसने बलराम के घर पहुंचकर उसकी पत्नी ममता और साली समता को बताया कि वह एक एनजीओ से आई है। ममता ने अठारह दिन पहले ही एक बच्चे को जन्म दिया था। अभी उसका नामकरण भी नहीं हुआ था। उस महिला ने कहा कि हमारा एनजीओ स्वस्थ्य बच्चों को छह हजार रुपए देता है और उसके अलावा उनकी पढ़ाई का खर्च भी उठाता है। इसके बाद उस महिला ने दोनों से कहा कि वह बच्चे को लेकर उसके साथ पीजीआई चलें ताकि बच्चे के स्वास्थ्य का सार्टिफिकेट लिया जा सके। पीजीआई में पहुंचकर महिला ने बच्चा मां से यह कहकर ले लिया कि मैं जांच कराकर अभी आई। इसके बाद वह महिला नहीं लौटी। काफी देर इंतजार के बाद ममता को अपने ठगे जाने का अहसास हुआ। गुरुवार शाम को पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा दी गई। पुलिस ने शुक्रवार को इस बच्चा चुराने वाले गैंग का भांडाफोड़ कर दिया। बच्चे को लुधियाना से बरामद कर लिया गया। उसे ३० हजार रुपए में बेचा गया था। इस पूरे मामले में एक गाइनी की डॉक्टर सहित तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है। इस तरह एक निजी अस्पताल में बच्चा चुराने का काम इस स्तर पर चल रहा होगा यह कोई सोच भी नहीं सकता। हिन्दुस्तान चंडीगढ़ की खबर के मुताबिक रोपड़ निवासी रश्मी ही बच्चा लेने कालोनी नंबर पांच गई थी। वहां से वह एक निजी अस्पताल में पहुंची वहां गायनी डॉक्टर रश्मि जैन से मिली। रश्मि की बहन नर्स कविता और नर्स जया को भी इस मामले की जानकारी थी। उन्होंने यह बच्चा ३० हजार रुपए में लुधियाना के एक दंपति को बेच दिया। असल में यह बच्चा इसी नर्सिंग होम में जन्मा था। पुलिस जब पूछताछ करने पहुंची तो उसे शक हुआ। डॉक्टर और नर्स का फोन सर्विलांस पर लगाया गया। कड़ाई से पूछताछ के बाद सारी कहानी साफ हो गई।

0 comments: