Tuesday, July 28, 2009

चंडीगढ़ की चार नई पहचान

अब चंडीगढ़ की चार नई पहंचान होंगी। अंडमान निकोबार द्वीप समूह और लक्ष्यदीप के बाद चंडीगढ़ ऐसा तीसरा केंद्र शासित प्रदेश बन गया है, जिसने अपने प्रतीक घोषित कर दिए हैं।
स्टेट ट्री - चंडीगढ़ का स्टेट ट्री आम होगा। इसकी वजह यह बताई जाती है कि यह इलाका पहले अपनी अमराई के लिए जाना जाता था। पहले यह अंबाला का हिस्सा था। इसी वजह से इस क्षेत्र का नाम आमवाला जो बिगड़ कर अम्बाला हुआ। यहां के कुछ सेक्टरों में अब भी आम के प्राचीन पेड़ देखे जा सकते हैं, जो अब हेरिटेज का हिस्सा बन चुके हैं।
स्टेट फ्लावर - पलाश यानी ढाक चंडीगढ़ का स्टेट फ्लावर होगा। वही ढाक जिनके फूलों से बसंती रंग बनता है। कृष्णजी इसी रंग से होली खेलते थे। ढाक का पुराना महत्व है। इस पेड़ पर तिकड़ी के रूप में पत्ते आते हैं। इसलिए ढाक के तीन पात मुहावरा भी बना है। इसके फूलों को ही टेसू के फूल कहा जाता है। ढाक के सुर्ख गुलाबी-लाल से ये फूल जब जंगल में खिलते हैं तो लगता है, जंगल में आग लगी है।
स्टेट बर्ड - चंडीगढ़ की स्टेट बर्ड होगी इंडियन ग्रे हॉर्नबिल। यह पक्षी सुखना वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में खूब देखा जा सकता है। इन्हें हमेशा जोड़ों के रूप में देखा जाता है। मादा पेड़ की खोतर में जब अंडे देती है तो नर इस बिल को ऊपर से ढक देता है। फिर खुद दाना लाकर बच्चों और मादा का पेट भरता है। इस पक्षी की संख्या लगातार घट रही इन्हें बचाने की मुहिम तेज करने की भी जरूरत है।
स्टेट एनिमल -नेवला चंडीगढ़ का स्टेट एनिमल होगा। नेवले के बारे में सब को मालूम है कि वह सांप को भी मार सकता है। मगर अब इन्हें भी संरक्षण की जरूरत है।
(हिन्दुस्तान चंडीगढ़ के मंगलवार के अंक में चित्रों सहित यह खबर विस्तार से देखी जा सकता ही। अन्य अखबारों ने भी अपने पूल आउट पर इसे प्रमुखता से छापा है)

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