Tuesday, June 30, 2009

इस बार

सीता का अपहरण कर
शादी के लिए दबाव नहीं डालेगा
और न ही इतना इंतजार करेगा
क्योंकि इसबार
वह दशानन के नहीं इन्सान के मुखौटे में है।।
-सुधीर राघव
(सुधीर राघव की अन्य कविताएं आप http://sudhirraghav.blogspot.com/ पर देख सकते हैं)

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