यह समय है, जब उत्तर भारत में मानसून के स्वागत में मल्हार गए जाते हैं, मगर अब सूखे का संकट है और किसान का कवि मन अशांत। मेढ़क-मेढ़की की शादी, महिलाओं का खेत में हल चलाना और तरह-तरह के टोटके बारिश के लिए किए जा रहे हैं। पर इंद्र देव पसीज नहीं रहे। मौसम विग्यानी कह रहे हैं कि मानसून भटक गया है। बादलों की चाह में आकाश निहारते किसी बेचारे किसान से पूछे तो यही कहता है कि यह तो घोर कलियुग का प्रताप है। इतने पाप हो रहे हैं तो ऐसा ही होगा। खेर जो भी हो यह वक्त बातों का नहीं कुछ करने का है। थोड़ी सी समझदारी काफी मदद कर सकती है।
नुकसान से कैसे बचें किसान
धान की रोपाई का यह सीजन है। किसान चिंता में है कि वह क्या करे। पनीरी तैयार है। खेत में पानी के लिए ट्यूवैल का सहारा है। कुछ जोशिले किसान ट्यूवैल चलाकर खेत रोप भी रही हैं। पर वे ज्यादा जोख म उठा रहे हैं। किसानों को चािहए कि वे धान की रोपाई से पहले बारिश का इंतजार कर लें। संभव है देर से रोपाई के चलते धान का उत्पादन कुछ कम हो मगर इससे वे और बड़े नुकसान से बच सकते हैं। ट्यूबवैल से सिंचाई करने पर िबजली और डीजल का खर्च अलग से पड़ेगा और जुताई-बुवाई के बाद भी अगर फसल बिना पानी के सूख जाती है तो नुकसान काफी उठाना पड़ेगा।
Thursday, June 25, 2009
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