सोमवार को चंडीगढ़ के अखबारों ने यह चौंकाने वाली खबर दी कि ट्राईसिटी यानी पंचकूला और मोहाली को मिलाकर कुल ४० हजार गे हैं। स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी के अश्वनि कुमार के हवाले से लिखा गया कि राष्ट्रीय एड्स कंट्रोल सोसायटी करीब ऐसे हजार लोगों की पहचान कर चुकी है। नैको के अनुमान के अनुसार यहां इनकी संख्या ४० हजार तक हो सकती है। पूरे देश में अनुमानित संख्या ढाई लाख है। सबसे गंभीर बात यह है कि इनमें एड्स और एचआईवी का प्रसार भी तेज गति से हो रहा है। यह दर करीब पांच फीसदी है।
कौन बनता है गे - इस संबंध में चिकित्सकों का कहना है कि जिन पुरुषों में पुरुष हार्मोन टेस्टेस्टेरोन कम होता है और जिन स्त्रियों में स्त्री हार्मोन की कमी होती है, उनमें समलैंगिकता का रुझान पाया जाता है। इसलिए इनका रुझान सीधे रूप में साथी से हार्मोन ग्रहण करने का रहता है। इसलिए इन लोगों में मुखमैथुन जैसी विसंगतियां भी पायी जाती हैं। यह सब उनमें कुदरती रूप से होता है।
कानून से अच्छी होगी चिकित्सीय मदद
हमारे समाज का ढांचा ऐसा है कि बच्चे इस तरह की इच्छाएं परिवार के सामने नहीं रख पाते हैं। इन लोगों को अगर किशोर अवस्था में चिकित्सीय मदद मिल जाए तो ऐसे रुझानों को पनपने से रोका जा सकता है। कानून में समलैंगिकों को राहत देने से अच्छा है कि इस ओर ध्यान दिया जाए। अप्राकृतिक कृत्यों को मान्यता देना सही नहीं है।
Monday, June 29, 2009
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