Thursday, October 30, 2008
बहरेपन की समस्या दोगुनी
सोहणी सिटी के लोगों के लिए यह खबर खास महत्व रखती है। शहर में बहरेपन की समस्या दोगुनी गति से बढ़ रही है। यह कहना है डाक्टरों का। उनका कहना है कि ओपीडी में श्रवण शक्ति संबंधी समस्याओं को लेकर आने वाले मरीजों की संख्या पिछले साल की तुलना में दुगनी हो चुकी है। प्रतिदिन करीब दो सौ मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें ज्यादातर युवा और कॉलसेंटरों में काम करने वाले हैं। डाक्टरों का कहना है कि मोबाइल और वाकमैन के इस्तेमाल से यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। अस्सी डेसीबल से ज्यादा की ध्वनि कान के लिए सुविधाजनक नहीं। आजकल कई ऐसे मोबाइल आ गए हों जो इससे तेज आवाज पैदा करते हैं। वॉकमैन का भी यही हाल है और हेडफोन तो कान के संक्रमण का भी बड़ा कारण बनकर उभर रहे हैं।
Tuesday, October 21, 2008
तनाव ने ली आईएएस अफसर की जान
पंजाब के सीनियर आईएएस अधिकारी एएस छतवाल ने रविवार को सेक्टर-३९ स्थित अपने अवास पर फांसी लगाकर जान दे दी। उन्होंने अपने सुसाइडनोट में लिखा है कि मैं तनाव में हूं, इस कारण आत्महत्या कर रहा हूं। पुलिस अब पता लगा रही है कि तनाव का कारण क्या था। उनकी पत्नी भी डॉक्टर हैं और मैडिकल की पढ़ाई के दौरान उनकी जूनियर थीं। दोनों ने लव मेरिज की थी। खुशहाल जिंदगी चल रही थी। बेटी जशमीन की शादी पिछले ही महीने हुई है। ऐसे में उन्हें क्या तनाव था, यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा।
असल में जिंदगी की भागदौड़ सिर्फ खुशहाली ही नहीं लाती, आदमी को थकाती भी है। छतवाल की मौत इसी का उदाहरण है। मनोचिकित्सक भले तनाव को मस्तिष्क के रसायनों का असंतुलन कहें, मगर असल में है यह समाज की विकृति। समाज जिस तेजी से बदल रहा, जिस तेजी से हमारी मान्यताएं बदल रही हैं, और जिस तेजी से लोगों की आपसे अपेक्षाएं बदल रही हैं, उस तेजी से ही उन सबसे सामंजस्य बैठा पाना सबके बस की बात नहीं। तब निराशा और तनाव उत्पन्न होता है। छतवाल की योग्यता पर शक नहीं किया जा सकता, वे पटियाला मेडीकल कालेज से आईएएस बनने वाले पहले छात्र थे। समाज की गति भी नहीं रोकी जा सकती, आदमी को ही खुद को सहज करने के प्रयत्न करने होंगे।
यह खबर बिस्तार से हिन्दुस्तान के चंडीगढ़ के अंक में पढ़ी जा सकती है।
असल में जिंदगी की भागदौड़ सिर्फ खुशहाली ही नहीं लाती, आदमी को थकाती भी है। छतवाल की मौत इसी का उदाहरण है। मनोचिकित्सक भले तनाव को मस्तिष्क के रसायनों का असंतुलन कहें, मगर असल में है यह समाज की विकृति। समाज जिस तेजी से बदल रहा, जिस तेजी से हमारी मान्यताएं बदल रही हैं, और जिस तेजी से लोगों की आपसे अपेक्षाएं बदल रही हैं, उस तेजी से ही उन सबसे सामंजस्य बैठा पाना सबके बस की बात नहीं। तब निराशा और तनाव उत्पन्न होता है। छतवाल की योग्यता पर शक नहीं किया जा सकता, वे पटियाला मेडीकल कालेज से आईएएस बनने वाले पहले छात्र थे। समाज की गति भी नहीं रोकी जा सकती, आदमी को ही खुद को सहज करने के प्रयत्न करने होंगे।
यह खबर बिस्तार से हिन्दुस्तान के चंडीगढ़ के अंक में पढ़ी जा सकती है।
Friday, October 17, 2008
नतीजे गंभीर होंगे- मंदी भाग 2
जैसा कि पिछले लेख में हम जान चुके हैं कि महंगाई बढ़ने से बचत घटी, बचत से निवेश, निवेश से उत्पादन और उत्पादन से रोजगार में कटौती शुरू हुई। रोजगार में कटौती शुरू हुई तब हमें पता चला कि शेयर बाजार के लड़खड़ाने का कुछ मतलब था। दुनिया का सारा अर्थशास्त्र पेट से निकलता है और सिर्फ दिमाग ही नहीं कई कारकों से चलता है। रोजी-रोटी पर संकट आने के बाद सब जागे। पहले हमें लग रहा था कि यह सिर्फ अमेरिकी अर्थव्यवस्था में चल रही मंदी का मामूली असर है, हमारी अर्थ व्यवस्था मजबूत है, मगर ये सब बातें आसानी से गले नहीं उतर रहीं। आसानी से तो यह भी गले नहीं उतर रहा कि अमेरिका हम पर अचानक इतना मेहरबान क्यों हुआ और परमाणु डील के सारे रोड़े खुद आगे बढ़कर हटाए। यह सिर्फ उसकी विदेश नीति थी या इसके पीछे अर्थशास्त्र का कोई पेंच। इस पर हम आगे चर्चा करेंगे, फिलहाल जानते हैं कि आगे क्या होने वाला है। साथ ही जानेंगे नेहरू मॉ़डल कैसे फेल हुआ।
यह आप विस्तार से पढ़ सकते हैं इसी ब्लॉग प्रोफाइल में सुधीर राघव में या फिर सीधे क्लिक करें- sudhirraghav.blogspot.com
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Thursday, October 16, 2008
गरीब का दुष्चक्र जाग उठा
महंगाई बढ़ने के साथ-साथ शेयर बाजार का लड़खड़ाना, ब्याज दरों का बढ़ना, बैंक की किश्तें चुकाने में अक्षम लोगों की संख्या में बढ़ोतरी और अब नौकरियों पर संकट। क्या विसस सर्कल ऑफ पॉवर्टी ऑन हो चुका है। अर्थ शास्त्र की इस स्थिति को हिंदी में हम गरीबी का दुष्चक्र कह सकते हैं। हालांकि अर्थशास्त्री इस बात से पूरी तरह सहमत नहीं हैं मगर इस दुष्चक्र के जो सात चरण हैं उनमें से पांच हमें देश की अर्थ व्यवस्था में दिख रहे हैं। यानी हम पांचवीं स्टेज पर पहुंच गए हैं, इस दिशा में दो कदम और आगे बढ़े तो बदहाली के दलदल में देश एक बार फिर फंस सकता है। याद करें-१९८९ को, तब चंद्रशेखर प्रधानमंत्री थे और भारत सरकार को अपने नियमित खर्चों के लिए सोना तक गिरबी रखना पड़ा था।
क्या है यह दुष्चक्र इस संबंध में आप विस्तार से पढ़े- sudhirraghav.blogspot
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मंदी का असर
मंदी का असर सोहणी सिटी में भी दिखने लगा है। क्वार्क सिटी ने वीरवार को १० इंजीनियर और १०० अस्थाई कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। दो दिन पहले भी कंपनी ने १०० अस्थाई कर्मियों को काम से निकाला था। सुभिक्षा भी कर्मचारियों को पहले ही छंटनी कर चुकी है। इस बीच जेट ने अच्छी खबर दी है। वह अपने कर्मचारियों को बहाल कर रहा है। अन्य कंपनियों को भी इससे सबक सीखना चाहिए। कर्मचारियों में कटौती की जगह गैर-उत्पादक खर्च घटाने चाहिए।
Tuesday, October 14, 2008
सरोगेट मदर
यह खबर आपको हैरान कर सकती है। चंडीगढ़ में कुछ लड़किया किराए पर कोख देने को करियर के तौर पर अपना रही हैं। इस काम के लिए उन्हें २५ से ३० लाख रुपए तक मिल रहे हैं। खासकर इंटरनेट के माध्यम से वे ग्राहक भी ढूंढती हैं। सेक्टर ३३ के संत मेमोरियल नर्सिंग होम की डाक्टर उमेश जिंदल ने बताया कि उनसे कई लोग इसके लिए संपर्क करते हैं। ऐसे तीन केस सफल भी हो चुके हैं। इस खबर को बिस्तार से हिन्दुस्तान के मंगलवार के अंक में पढ़ जा सकता है। रिपोर्ट है तरुणी गांधी की।
Wednesday, October 8, 2008
सोहणी सिटी में ४० जगह जलेगा रावण
सोहणी सिटी में दशहरे पर कड़ी सुरक्षा की गई है। चालीस जगह रावण दहन होगा। सबसे ऊंचा रावण ७५ फुट का होगा। यह सेक्टर ४६ में होगा और इसे रिमोट सर्किट सिस्टम से जलाया जाएगा। ऐसा शहर में पहली बार होगा। पंचकूला में तो इस बार आयोजक ने सुरक्षा के लिए बाउंसर भी तैनात किए हैं। पुलिस ने भी सुरक्षा के काफी प्रबंध किए हैं। यहां-यहां होगा रावण दहनसेक्टर-२२ में नेहरू पार्क, सेक्टर-१७ में परेड ग्राउंड, सेक्टर-२४ में वाल्मीकि मंदिर के पास, सेक्टर-२९ में ओसीएफ एस्टेट, हाउसिंग बोर्ड, रामदरबार में दो जगह, सेक्टर-३०, सेक्टर-४६, सेक्टर-४१ में चर्चवाला ग्राउंड, सेक्टर-३७ डी मार्केट, सेक्टर-५३ में नेहरू कालोनी आदि प्रमुख हैं।
Monday, October 6, 2008
ये हरियाणा पुलिस है भाई
लगता है हरियाणा पुलिस ने कसम खा ली है कि वह नहीं सुधरेगी। सरिता कांड, सुमन कांड और ऐसे ही कई कांड उसकी आंखें नहीं खोल पा रहे हैं। चोर मजे से अपने काम को अंजाम देते हैं। पुलिस को सूचित किया जाता है तो वह अगले दिन सुबह पहुंचती है। पंचकूला के सेक्टर चार में गत रात ११ कारों के शीशे तोड़ कर म्यूजिक सिस्टम चुरा लिए गए। जब चोर यह काम कर रहे थे तो एक गाड़ी का सिक्योरिटी अलार्म बज गया। कार का मालिक बाहर निकला, चोरों को देख उसने पुलिस को सूचित करना चाह। पहले करीब ४५ मिनट तक सौ नंबर पर फोन ही नहीं उठाया गया। लोगों ने तब कंट्रोल रूम का दूसरा नंबर ढूंढ कर संपर्क किया। सवा तीन बजे फोन उठा। सूचना रिसीव की गई मगर पुलिस वाले मौके पर पहुंचे सुबह साढ़े छह बजे के बाद। नाराज लोगों ने पुलिस की इस सुस्ती पर खूब नारेबाजी की। अब एसपी खिरवार का कहना है कि जल्द ही चोरों को पकड़ लिया जाएगा। यह पुलिस कब सुधरेगी यह वक्त ही बताएगा।
Sunday, October 5, 2008
रीयल एस्टेट में मंदी
बैंकों की ब्याज दर बढ़ने के साथ ही आई रीयल एस्टेट क्षेत्र की मंदी ने बिल्डरों की पांव तले की जमीन खिसका दी है। ग्राहक ढूंढे से भी नहीं मिल रहे हैं। तीन-चार साल से मोटे मुनाफे का सौदा कर रहे बिल्डरों के लिए अब घाटे का सौदा उठाना बड़ा ही परेशानी वाला है। ग्राहकों को खींचने के लिए कोला ब्रांडों की तरह या अन्य उपभोक्ता वस्तु उत्पादकों की राह पर चलते हुए वे भी दिवाली पर स्कीम लेकर आए हैं। चंडीगढ़ में ऐसी ही स्कीमों के तहत मलेशिया और सिंगापुर की यात्रा का टिकट, एसी और एलसीडी टीवी फ्लैट के साथ देने की घोषणा की जा रही है। कुछ ने ड्रा स्कीम भी शुरू की है। हिन्दुस्तान में रामकृष्ण उपाध्याय की रिपोर्ट में इस बारे में विस्तार से जाना जा सकता है। रविवार के अंक में यह विस्तार से प्रकाशित की गई है।
Saturday, October 4, 2008
Thursday, October 2, 2008
खुदा के बंदे
तुम बम फेंकने निकले
तुम्हारे निशाने पर थे
मासूम, बेगुनाह लोग
तुम्हें लगता होगा
तुम खुदा के बंदे हो
पर जब बम फटता है
यकीन मानो तब
खुदा नहीं शैतान खुश होता है
खून चाहिए शैतान को
खुदा को नहीं
वह तो तुम्हारी नीयत देखता है
ऐ दहशत के ठेकेदारो
तुम खुद को भले ही खुदा का बंदा कहो
पर खुदा तुमसे बिल्कुल खुश नहीं है
कयामत के रोज
जब सारा हिसाब होगा
तो खुदा तुम्हारे नहीं
उस बच्चे के साथ होगा
जिसके हाथ तुम्हारा गिरा टिफिन लौटाने के लिए
मासूमीयत से आगे बढ़े थे
और पूरा शरीर चीथड़ों में बिखर गया।
यकीन न हो तो
अपने दिल पर हाथ रख कर पूछना
कि खुदा का असली बंदा कौन है
तब तुम्हारे सपने में आएंगे वे दोनों हाथ
जो तुम्हारा गिरा टिफिन लौटाने
तुम्हारे पीछे दौड़े थे
अगली बार कहीं बम
फैंकने से पहले
खुदा का नाम मत लेना।
-सुधीर राघव
Wednesday, October 1, 2008
पॉलिथीन के इस्तेमाल पर ५ साल तक की कैद संभव
सोहणी सिटी में पॉलिथीन के इस्तेमाल को रोकने के लिए प्रशासन ने काफी कड़े कदम उठाए हैं। यह कानून आज दो अक्तूबर से लागू कर दिया गया है। डीसी आरके राव के अनुसार कानून तोड़ने पर पांच साल जेल या एक लाख रुपए तक जुर्माना या दोनों साजाएं एक साथ हो सकती हैं। जितने दिन तक उल्लंघ्न होगा पांच हजार रुपए प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगेगा। एक बार अपराधी करार देने पर यदि फिर से व्यक्ति इसी दोष में लिप्त पाया जाता है तो सात साल तक कैद की सजा दी जा सकती है। यदि किसी कंपनी में इस नियम के उल्लंघ्न की बात सामने आती है तो हरकर्मचारी को दोषी माना जाएगा। उसी अनुसार कार्वाई होगी।
इस तरह सजा का काफी कड़ा प्रावधान प्रशासन ने किया है। इसका विरोध होगा।
इस तरह सजा का काफी कड़ा प्रावधान प्रशासन ने किया है। इसका विरोध होगा।
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