Tuesday, September 30, 2008

एक है जर्मन लड़की

चंडीगढ़ के होटल ताज से कुछ युवकों ने एक जर्मन युवती का अपहरण कर लिया। शनिवार रात दो बजकर दस मिनट पर यह वारदात हुई। इसी दिन शहर में विश्व पर्यटन दिवस प्रशासन जोर-शोर से मना रहा था। आरोपी एक स्कॉर्पियो में थे। लड़की अपने दोस्तों के साथ कॉफी पीने रात को होटल पहुंची थी। रविवार को युवकों ने लड़की को सेक्टर २० में उसके दोस्त के घर के पास वापस छोड़ दिया। लड़की १७ के पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई कि युवक उसका अपहरण करके ले गए थे और उन्होंने उससे सामूहिक बलात्कार की कोशिश भी की। इसके बाद पुलिस हरकत में आई। दो युवकों को गिरफ्तार कर लिया गया है। बाकी आरोपियों के नाम का भी खुलासा हो चुका है। सभी जमींदार परिवारों के हैं। अंबाला के आसपास के गांवों के रहने वाले हैं। ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं और कोई काम धंधा भी नहीं करते। युवकों का कहना है कि वे लड़की को लेकर स्थान बदलते रहे, क्योंकि वह चीखती थी और कोई आ न जाए इस डर से वे जगह छोड़ कर दूसरी जगह चल देते थे। अपहरण में जिस स्कॉर्पियो का इस्तेमाल किया गया वह छछरौली (यमुनानगर) के मार्केट कमेटी के चेयरमैन की बताई जाती है।

Sunday, September 28, 2008

हरियाणा की साख को बट्टा

हरियाणा पुलिस की बेइमानी और गुंडई के चलते प्रदेश की साख को बट्टा लग रहा है। ऐसे प्रदेश में जिसका लिंगानुपात में भी खराब रिकार्ड है और प्रति हजार पुरुष महिलाओं की संख्या काफी कम है, वहां महिला उत्पीड़न के एक के बाद एक मामले सामने आना हर हरियाणावासी के लिए शर्मनाक है। न्याय के लिए भटकती महिलाएं आत्महत्या करने को विवश है। ऐसा लगा था कि सरिता मामले के बाद पुलिस कुछ सुधर जाएगी, मगर अब सुनीता द्वारा भी आत्महत्या का प्रयास करने का मामला सामने है। सुनीता के पहले पिता और हाल ही में भाई का कत्ल कर दिया गया। सुनीता की मां का कहना है कि पुलिस ने आरोपियों से रिश्वत लेकर उसके पति की हत्या के मामले को आत्महत्या में बदल दिया था। बाद में आरोपियों ने सुनीता के भाई का भी अपहरण कर लिया और चार दिन बाद उसकी लाश एक नाले से मिली। लाश को देखकर लगता था कि सुओं से बुरी तरह गोदकर हत्या की गई। नामजद रिपोर्ट हुई मगर हत्या जैसे मामले में भी आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया। पुलिस के निकम्मेपन का नतीजा यह निकला कि आरोपियों ने सुनीता से भी बलात्कार किया। अब उसका घर से निकलना भी दूभर कर दिया था। मजबूरी में उसे वही कदम उठाना पड़ा जो सरिता ने उठाया था। हरियाणा सरकार को चाहिए कि वह अपनी पुलिस और अधिकारियों को समझाए कि उनकी भूमिका समाज में सभ्यता को बढ़ावा देने के लिए है। वह किसी सुपारी छाप गुंडे की लैठत या शार्पशूटर नहीं हैं। उम्मीद है कि अब हरियाणा पुलिस में परर्शिता बढ़ाने और उसे सभ्यता का पाठ पढ़ाने के लिए कुछ ठोस उपाय होंगे। ताकि मानवता और हरियाणावासी भविष्य में इस तरह शर्मिंदा न हों। आर्थिक प्रगति के साथ-साथ त्वरित न्याय के लिए भी ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

Thursday, September 25, 2008

वेंडरों ने लूटी ट्रेन

लुधियान से बिहार जा रही जन साधारण एक्सप्रेस में पांच वेंडरों के एक गिरोह ने खन्ना और सरहिंद के बीच लूटपाट की। ऐसा मामला शायद पहली बार सामने आया है, जब रेलवे वेंडर ही घटना में लिप्त पाए गए। जीआरपी की एसएसपी भारती अरोड़ा ने अंबाला में कहा है कि एक लाख रुपये से ज्यादा की लूट हुई है। लुटेरे खन्ना से चढ़े थे पहले उन्होंने ट्रेन के ठसाठस भरे साधारण डिब्बे में बैठकर शराब पी, उसके बाद रिवाल्वर और चाकू निकालकर लोगों और महिलाओं से नकदी और गहने छीनने लगे। जिन लोगों ने विरोध किया उन्हें बोतल मार कर घायल कर दिया। करीब १५ घायलों को अंबाला के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। रास्ते में ही चेन खींचकर ट्रेन रोक ली गई, जब ये लुटेरे भाग रहे थे, उसी वक्त आरपीएफ के दो जवान ट्रेन रुकने पर आ गए। इन जवानों और यात्रियों ने मिलकर तीन लुटेरो को काबू कर लिया। इन्हें ट्रेन के शौचालय में बदकर लाया गया और अंबाला जीआरपी को सौंप दिया गया। लुटेरों की पहचान हो गई है। इनमें चार लुधियाना के थे और एक हरियाणा के पानीपत जिले के समालखा का। जिन्हें लूटा गया वे बिहार और यूपी जा रहे थे। इन सभी लुटेरों की उम्र १९ से २२ वर्ष के बीच बताई जाती है।
इस खबर के बारे में विस्तार से हिन्दुस्तान के आज के अंक में पढ़ा जा सकता है।

Wednesday, September 24, 2008

बेबी का वेबजाल

इस खूबसूरत शहर में चोरी-चकारी ही नहीं देह व्यापार का धंधा भी तेजी से फल-फूल रहा है। इंटरनेट के जरिए इसे खुल कर चलाया जा रहा है। किसी भी सर्च इंजन पर चंडीगढ़ गर्ल्स टाइप करने पर आपको ढेर सारे रिस्पांस मिलते हैं। पहले ही पेज पर ६-७ टेलीफोन नंबर मिल जाएंगे। इनमें से ही एक नंबर पर मंगलवार को हिन्दुस्तान के एक संवाददाता ने बात की, दूसरी ओर से बात कर रहा दलाल १५ हजार रुपए में लड़की भेजने को राजी था। इन दलालों ने ग्राहकों के लिए कॉल गर्ल्स की अलग-अलग श्रेणियां बना रखीं हैं। इनमें मॉ़डल्स, कालेज गर्ल्स, पीजी गर्ल्स, टीनएजर, हाउस वाइव्स आदि केटेगरीज हैं। कुछ साइट्स पर फीमेल एस्कॉर्ट्स के नाम पर भी कॉलगर्ल्स भेजने का धंधा जारी है।
हिन्दुस्तान के आज के अंक में यह खबर और विस्तार से पढ़ी जा सकती है।

Tuesday, September 23, 2008

तितली तुम तिलमिलाओ

तितली से पंख उधार लेकर क्या कर लोगी

कुछ खिलंदड़ बच्चों का ध्यान जरूर खींच लोगी

वे तुम्हारे पीछे दौड़ेंगे

इस फूल पर नहीं तो

उस डाली पर

पकड़ ही लेंगे

और सहेज लेंगे

मोटी किताब के पन्नों में

उनका तो खेल ठहरा

पर तुम्हारी जान जाएगी

बड़े होकर कभी वे खोलेंगे

उस पन्ने कोतब तक तुम बदरंग हो चुकी होगी

बहुत हुआ तो हो सकता है

उसे अपने किए पर शर्म आए

पर एक शर्मशार चेहरा देखने के लिए

क्या तुम इतनी बड़ी कीमत चुकाओगी

मैं तुम्हें बताता हूं

देश की जनता क्या कर सकती है

यों तितली से पंख उधार मांग कर काम नहीं चलेगा

हमें चील-गिद्धों से निपटना

हमें रोकना है खुद को लाश में तबदील होने से

सपनों को साकार करना है तो

जिंदा रहने की कला सीखो

तितली के पंख मांग कर

सपने साकार नहीं होते।

-सुधीर राघव

Monday, September 22, 2008

तांत्रिक रजा बंगाली हिरासत में

चंडीगढ़, जो शिक्षा की दृष्टि से देश में विशेष महत्व रखता है, वहां भी तंत्र-मंत्र का धंधा खूब फल-फूल रहा है। हो सकता है यह बात गैर-चंडीगढ़ियों को अटपटी लगे। मगर यहां के सेक्टरों की मुख्य सड़कों पर घूमेंगे तो आपका शक दूर हो जाएगा। यहां जगह-जगह आपको ज्योतिषि बैठे मिलेंगे। ये तंत्रमंत्र वाले लोगों को कितना ठग रहे हैं, इसका खुलासा वकीलों के एक संगठन ने सोमवार को किया। वकील भी तब हरकत में आए जब एक वकील की मां को ही एक तांत्रिक ने ठग लिया। सुबह साढ़े ११ बजे पुलिस को लेकर वकील तांत्रिक रजा बंगाली के दफ्तर पहुंच गए। इस पर तांत्रिक ने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का नाम लेकर उन्हें धमकाया। वकील गुस्से में आ गए। एक थप्पड़ में बंगाली का सारा तंत्र हवा हो गया। पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। बताया जाता है कि वकील नरिंदर की मां स्कलोड्रमा से पीडि़त थी। तांत्रिक ने उसके इलाज के लिए पैसे लिए और २४ घंटे में ठीक हो जाने की बात कही पर मां ठीक होने की जगह उनका देहांत हो गया। इसी तरह इस तांत्रिक पर मनीमाजरा की अंजु शर्मा से भाई की शादी करवाने के नाम पर १६ हजार रुपये ठगने का आरोप है। काम न होने की शिकायत करने पर वह जान से मरवा देने की भी धमकी देता था। इसलिए लोग चुप रह जाते है।

Sunday, September 21, 2008

वाहन चोरों का बोलबाला

चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली में आजकल वाहन चोरों का बोलबाला है। पुलिसवाले हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। दिनदहाड़े निकलने वाले चेन स्नैचर आज तक उनके काबू नहीं आए तो वाहन चोर तो रात में अपना काम करते हैं, वे कैसे पकड़ में आते। पुलिस महकमा भले अलग हो मगर उसका स्लोगन वही ट्रांसपोर्ट विभाग वाला है, जो हर बस में लिखा होता है, सवारी अपने सामान की खुद जिम्मेवार है। उसी तरह इन तीनों शहरों में आप रहते हैं, तो अपनी सुरक्षा के खुद जिम्मेवार हैं। पुलिस के भरोसे मत रहिएगा। वाहन चोर भी यह जानते हैं, इसलिए मजे से अपना काम कर जाते हैं। पब्लिक को बात देर से समझ में आती है, इसलिए वह धीरे-धीरे जाग रही है। मोहाली के सेक्टरों में तो अब चोरी से परेशान लोगों ने खुद रातभर जागकर बारी-बारी नाका लगाना शुरू कर दिया है। पंचकूला, चंडीगढ़ के लोगों को भी देर-सवेर यही करना होगा। दैनिक हिन्दुस्तान में यह खबर विस्तार से पढ़ी जा सकती है।

Saturday, September 20, 2008

बारिश

दो दिन से लगातार जारी बारिश ने लोगों का जीन मुहाल कर दिया है। आसमान में घटाएं छाई हैं, ज्यादातर हल्की फुहारें ही रहती हैं और कभी-कभार बौछारें। देखन-सुनने में तो यह सुहाने मौसम जैसा है, मगर लगातर बनी यह स्थिति समस्याएं भी लेकर आई है। प्रशासन को स्कूलों की छुट्टी करनी पड़ी है। शहर में कई जगह जलभराव से सड़कें भी टूट गई हैं। इससे आने जाने वालों को परेशानी हो रही है। शिमला में तो बारिश के चलते पहाडि़यां खिसकने से कम से कम ४० लोगों के मारे जाने की खबर है। मोहाली और पंचकुला जिलों से भी मौत की खबरें हैं। मौसम विभाग के अनुसार ये बौछारें सिर्फ आस-पास तक सीमित नहीं हैं। पूरे उत्तर भारत में और मध्यप्रदेश तक रिमझिम बरसात हो रही है। मध्य प्रदेश के आकाश में बना लो प्रेशर एरिया इसका कारण बताया गया है।

Friday, September 19, 2008

एहसानफरामोश

सोहणी सिटी के सितारे और देश के टॉप शूटर अभिनव बिंद्रा को भारतीय रायफल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह द्वारा एहसानफरामोश कहा जाना, होनहारों का अपमान है। दिग्विजय कह रहे हैं कि इन लोगों (अभिनव) के सिर सफलता का नशा सवार हो गया है। हमारे सहयोग के बिना अभिनव और जसपाल का इस मुकाम तक पहुंचना मुमकिन नहीं था। असल में दिग्विजय को परेशानी यह है कि देस को पहली बार गोल्ड मिली, उसका श्रेय उन्हें और उनके संस्थान को मिलना चाहिए। खिलड़ी जीतकर आते। उनके आगे नतमस्तक होते और कहते कि उनकी वजह से ही जीत मिली है। हमारे देश में गुरडम और मठाधीशी इतनी ज्यादा है कि संस्थाओं पर काबिज लोग बड़ी ऐसा ही व्यवहार करते हैं। अब इस मामले पर डट कर विरोध होना चाहिए ताकि ऐसे लोगों को हतोत्साहित किया जा सके।

Wednesday, September 17, 2008

चंडीगढ़ पर पंजाब की नजर

चंडीगढ़ पर पंजाब की शुरू से ही नजर रही है। पंजाब के नेता और खासकर अकाली राजनीति में चंडीगढ़ की मांग को लेकर कई बार माहौल गरमाया है। पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने इस बार फिर नया शिगूफा छोड़ा है। उनका कहना है कि पंजाब से चंडीगढ़ के लिए कुछ और रास्ते मिलने चाहिए। इस संबंध में उन्होंने चंडीगढ़ के प्रशासक जनरल (रिटायर्ड) एसएफ रोड्रिग्स को पत्र भी लिखा है। इसमें एक आउटर बाईपास बनाने की बात कही गई है, जिससे शिमला-उत्तराखंड के वाहनों की भीड़ चंडीगढ़ में न बढ़े। साथ ही मध्यमार्ग से नाडा के लिए भी रास्ता मांगा है। उनकी इन मांगों को लेकर चंडीगढ़ प्रशासन दुविधा में है। नया गांव मास्टर प्लान में पंजाब ने बिना पूछे ही चंडी़गढ़ की हद में सड़क का प्रस्ताव बना दिया है।
(इस संबंध में विस्तृत खबर आज के हिन्दुस्तान के अंक में पढ़ी जा सकती है। यह रामकृष्ण उपाध्याय की विशेष रिपोर्ट है।)

Tuesday, September 16, 2008

नंबर वन चंडीगढ़

सोहणी सिटी के लिए यह अच्छी खबर है। प्रतिव्यक्ति आय में चंडीगढ़ फिर नंबर वन हो गया है। वर्ष २००७-२००८ के एक त्वरित अनुमान के अनुसार यूटी की प्रतिव्यक्ति आय १,१०,६७६ रुपए वार्षिक हो गई है। वर्तमान कीमतों के आधार पर चंड़ीगढ़ ने ११.५० फीसदी की बढ़ोतरी की है। चंडीगढ़ में सबसे तेजी से रिटेल और सर्विस सेक्टर प्रगति कर रहा है। प्रतिव्यक्ति आय की दृष्टि से चंडीगढ़ के बाद गोवा का नंबर है। यह आंकड़े डायरेक्टरेट ऑफ इक्नोमिक्स एंड स्टेटिस्टिक्स ने जारी किए हैं। हमारे पड़ोस में हरियाणा से आगे पंजाब चल रहा है। हरियाणा में जहां प्रतिव्यक्ति आय ४९०३९ रुपये वार्षिक हो गई है, वहीं पंजाब में यह मात्र ४०५६६ रुपये ही है। हिमाचल में यह सिर्फ ३६७८२ मगर दिल्ली में ६६७२८ रुपये है। इस संबंध में विस्तार से दैनिक हिन्दुस्तान के मंगलवार के अंक में जाना जा सकता है।

Friday, September 12, 2008

पीयू पर सोपू और एबीवीपी का कब्जा

पंजाब यूनिवर्सिटी के चुनाव में सोपू और एबीवीपी के गठबंधन ने विपक्ष का सफाया कर चारों सीटों पर कब्जा कर लिया। सोपू के साहिल नंदा प्रेजिडेंट, एबीवीपी की पारुल चौधरी वाइस प्रेजिडेंट और प्रशांत शर्मा सचिव तथा सोपू के दीपक ठाकुर संयुक्त सचिव चुने गए। यह चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न हो गया। जीतने वाले पदाधिकारियों ने अपनी रणनीति का भी खुलासा कर दिया है। उनका कहना है कि वे पीयू को सेंट्रल स्टेटस दिलाने के लिए संघर्ष करेंगे।
इस बारे में दैनिक हिन्दुस्तान के शनिवार के अंक में विस्तार से पढ़ा जा सकता है। साथ ही पढ़ी जा सकती हैं रवि प्रकाश की रिपोर्ट।

Thursday, September 11, 2008

धन्यवाद

सोहणी सिटी का कारवां लगातार आगे बढ़ रहा है। सोहणी सिटी यानी चंडीगढ़ में जो भी बड़ी घटना होती है, हम चाहते हैं कि उसे इस माध्यम से सबके रू-ब-रू कराया जाए। आपके सहयोग से यह कारवां इसी तरह आगे बढ़ता रहेगा। इस ब्लॉग ने सौ हिट प्राप्त किए हैं। इसका श्रेय चिट्ठाजगत और नारद को भी जाता है। उनका धन्यवाद। हर विजिटर का भी धन्यवाद।

एक सार्थक बहस

समाज में शिक्षा का जिस तरह से प्रसार हो रहा है, उससे यह उम्मीद बंधती है कि अब साइंस से जुड़े विषयों पर लोग अधिक जागरूक होकर बात कर सकते हैं। जिनेवा में हुआ महाप्रयोग साइंस के नजरिए से अब तक सबसे अनूठा प्रयोग है। इसे लेकर समाज में अच्छा खासा कौतुहल है। हिंदी ब्लागिंग को अभी कोई बहुत लोकप्रिय माध्यम नहीं कहा जा सकता, भले ही यह समाज अभी शैशव काल में भी फिर भी यहां सन्नाटा नहीं है। कोई बात कही जाती है, तो उस पर एक-दो प्रतिक्रियाएं मिलती ही जाती हैं। इसके अलावा नित्य नए लोग भी हिंदी ब्लागिंग से जुड़ रहे हैं। यह बढ़ता हुआ कुनबा है। इसलिए इसे भविष्य का एक सशक्त अभिव्यक्ति माध्यम भी कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।
फिलहाल मैं विषय से भटकना नहीं चाहता। जिनेवा के महाप्रयोग पर एक लेख लिखकर मैंने प्रतिक्रियाएं आमंत्रित की थीं। यह लेख दो ब्लॉग्स http://sohnicity.blogspot.com/ और http://sudhirraghav.blogspot.com/ पर डाला गाया था। दोनों जगह कुल मिलाकर पांच प्रतिक्रियाएं एक दिन में मिलीं। इनमें सर्वाधिक उत्साह बढ़ाने वाली प्रतिक्रिया रही भौतिकी साइंसदान जेसी फिलिप्स की। वह शास्त्री नाम से लिखते हैं। वे लिखते हैं-प्रिय सुधीर! यह मेरे अनुसंधान का क्षेत्र है, एवं इसके बगल की मशीनों के आंकडे मैंने अपनी पीएचडी ले लिये लिये थे.
शास्त्री जी के बारे में अगर आप जानना चाहें तो http://www.Sarathi.info पर जा सकते हैं।
सोहणी सिटी पर लेख में सबसे पहली प्रतिक्रिया दी संगीता पुरी जी ने। वह स्वयं गत्यात्मक ज्योतिष पर ब्लॉग चलाती हैं। वह लिखती हैं, वैज्ञानिको को प्रयोग करने की छूट तो मिलनी ही चाहिए। इतने सारे वैज्ञानिकों का इस कार्यक्रम से जुड़े होने से संदेह करना व्यर्थ लगता है। हमारी शुभकामनाएं वैज्ञानिको के साथ हैं।

http://sudhirraghav.blogspot.com/ पर एक ही ब्लॉगर सोतड़ी की तीन टिप्पणियां मिलीं। शायद वह अपनी बात विस्तार से कहना चाहते थे। एक तरह से उन्होंने इस महाप्रयोग का दूसरा पक्ष रखा। बिना दूसरा पक्ष मिले कोई भी चर्चा सार्थक नहीं होती। उन्होंने बड़े ही सशक्त तरीके से अपनी बात कही। उनकी टिप्पणियां ठीक-ठाक शब्दों में और बड़ी ही मजेदार हैं और ब्लॉग पर देखी जा सकती हैं। उनके कुछ सुझाव भी थे, पहला यह कि लेख के अंत से यह बात हटा दी जाए कि प्रतिक्रिया अवश्य दें। उनके इस सुझाव से मैं सहमत नहीं हूं। अगर हम किसी मुद्दे पर सिर्फ अपनी ही राय तक सिमटे रहना चाहते हैं तो उनका सुझाव सही हो सकता है, अगर हमें बात को हर पहलु से समझना चाहते हैं तो हमें इस पर विचार आमंत्रित करने चाहिए। अन्य लोग भी अपनी जानकारियों के साथ आते हैं और आपको एक सही और सत्य के करीब से करीब ले जाने में मदद करते हैं। उनके दूसरा सुझाव काफी अच्छा था, जिसे मान लिया गया। अब वह सीधे http://sudhirraghav.blogspot.com/ पर भी लिख सकते हैं। वह एक अच्छे कवि, पत्रकार, कहानीकार और लेखक हैं। मैं समझ सकता हूं कि यह हम सबके लिए उपयोगी होगा अगर वह इस ब्लॉग पर भी हमसे रू-ब-रू होते हैं।
वैसे उनके अपने ब्लाग http://sotadu.blogspot.com/ पर पढ़ने के लिए काफी कुछ है। उम्मीद है कि विभिन्न विषयों पर इस तरह की सार्थक बहस भविष्य में भी चलती रहेगी।

Wednesday, September 10, 2008

जगत कैसे रचा, वैज्ञानिक जान पाएंगे?

सृष्टि से पहले सत नहीं था,
असत भी नहीं,
अंतरिक्ष भी नहीं,
आकाश भी नहीं था।
दुनिया की सबसे पहली पुस्तक मानी जाती ऋग्वेद में सृष्टि के निर्माण को लेकर जिज्ञासाओं के ऐसे जवाब मिलते हैं। साइंस की नजर से आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। भारतीय समय के अनुसार ठीक १२ बजकर ३० मिनट पर वैज्ञानिकों सृष्टि के मूल कण को खोजने का प्रयोग किया। मूल कण जिसे हिग्स बोसान कण या गॉड पार्टीकल भी कहा जाता है। अध्यात्म तो बहुत पहले से कहता रहा है कि सारी सृष्टि उसी एक से बनी है। शंकराचार्य का अद्वैतवाद कुछ और नही उसी आत्मा- परमात्मा के एक ही अंश होने की बात करता है, जिस साइंसदान अब गॉ़ड पार्टीकल कहते हैं। फर्क इतना है कि वे इस गॉड पार्टीकल को अपने भीतर ही प्राप्त करने की बात करते रहे। अगर अध्यात्म सिर्फ कल्पना भी है तो भी उसके आकलन वैज्ञानिक प्रयोगों के अनुरूप ही निकल रहे हैं, यह सचमुच आश्चर्य जनक है।
यह हमेशा होता आया है कि अच्छे काम को लेकर हम आशंकाएं व्यक्त करते रहते हैं। अतः हेड्रोन कोलाइडर को लेकर भी प्रलय आने तक की बात कही गई। नास्त्रेदमस की कविताएं सुनाई गईं और उनके डरावने अर्थ निकाले गए। समाज में कुछ लोग अपनी जिज्ञासाओं का हल तलाशतें हैं, जबकि अन्य उनके खिलाफ मोर्चा खोलते हैं। चूंकि साइंस को लेकर आम आदमी के बीच कोई बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है, इसलिए ये आशंकाएं जल्दी परवान चढ़ती हैं। जो प्रयोग हुआ उसपर एक नजर हम भी डालते हैं।

अब तक का सबसे बड़ा प्रयोग
स्विट्ज़रलैंड और फ़्रांस की सीमा पर जमीन के करीब १७५ मीटर नीचे २७ किलोमीटर लंबी सुरंगनुमा प्रयोगशाला में यह प्रयोग हुआ। यह प्रयोगशाला भी दुनिया की सबसे लंबी प्रयोगशाला मानी जाएगी। इस पर करीब ४.४ अरब पाउंड खर्च हुए। ८५ देशों के करीब सात हजार वैज्ञानिकों ने इसके लिए काम किया। 27 किलोमीटर लंबी सुरंग में विशालकाय पाइपलाइन बिछाई गई है। सैकड़ों मीटर लंबे केबल लगे हुए हैं। इसमें एक हज़ार से अधिक बेलनाकार चुंबकों को जोड़ा गया। यह पूरा ढाँचा तीन अलग-अलग आकार के गोलों में बनाया गया। बीच में तीन जगह लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (एलएचसी) लगाए गए, जिसके अलग-अलग हिस्सों में प्रयोग के अलग-अलग परिणामों का डाटा एकत्र हुआ। चूकिं हर सैकेंड में करोड़ों घटनाएं होनी थीं, अतः ऐसा विशाल कंप्यूटर नेटवर्क तैयार किया गया, जो इन गणनाओं को दर्ज कर सके। एक अनुमान है कि प्रति सैकेंड १०० मेगाबाइट से ज्यादा आंकड़े एकत्र किए गए।

कैसे हुआ प्रयोग
२७ किलोमीटर लंबी सुरंग में विपरीत दिशाओं से प्रोटोन्स के दो बीम छोड़े गए। हैड्रोन कोलाइडर्स के पास इन बीम को चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न कर एक दूसरे की ओर मोड़ा गया। इससे प्रोटोन्स के बीच टक्कर हुई। इस टक्कर से क्या-क्या उत्पन्न हुआ, इसके डेटा को प्रोटोन मल्टीप्लीसिटी डिटेक्टर ने दर्ज किया। समझा जाता है कि प्रोटोन के टकराने पर बडे़ पैमाने पर ऊर्जा उत्पन्न हुई और एक सैकेंड के खरबवें (ट्रिलियन) हिस्से के लिए प्रोटोन्स और उन्में मौजूद क्वार्क समूह विखंडित हुए होंगे। इसी क्षण के लिए वह डार्क मेटर आस्तित्व में आया होगा, जो बिग-बैंग के समय उत्पन्न हुआ था और जिससे सृष्टि बनी। इस हिग्स बोसान कण भी कहा जाता है। इस कण की परिकल्पना स्विस साइंसदान पीटर हिग्स ने की थी पर इस नाम दिया गया भारतीय भौतिक शास्त्री सत्येंद्र नाथ बोस के नाम पर। बोस ने आइंस्टीन के साथ मिलकर उनके ऊर्जा और द्रव्यमान के संबंध वाली विश्वप्रसिद्ध अवधारणा पर काम किया था। भारतीयों के लिए यह भी गर्व की बात है कि सृष्टि के इस महत्वपूर्ण कण का नाम उनके साइंसदान के नाम पर है। इसलिए इस प्रयोग में भारत ने भी सामर्थ्य के अनुरूप मदद की है। भारत के करीब ३० साइंसदानों ने इसमें हिस्सा लिया। ये चंडीगढ़, जयपुर, भोपाल से हैं।

क्या कहती है थ्योरी
यह बात तो महान आइंस्टाइन से गणितीय आधार पर स्थापित कर दी थी कि ऊर्जा और पदार्थ के बीच सीधा संबंध है। उनके अनुसार किसी भी पदार्थ में द्रव्यमान और प्रकाशवेग के वर्ग के गुणांक के बराबर ऊर्जा होती है। या यो कहें कि वह इतनी ऊर्जा से बना होता है। पर ऊर्जा किस अवस्था में होते हुए पदार्थ में बदलती है, इसे अभी तक साबित नहीं किया जा सका है। यह साबित हो चुका है कि हर पदार्थ तत्व से और तत्व परमाणुओं से बना है। परमाणु आगे प्रोटोन, न्यूट्रान और इलेक्ट्रान का बंध हैं। इसके आगे के सवाल का उत्तर इन मूल कणों को तोड़ कर ही निकाला जा सकता है। यह प्रयोग प्रोटोन को तोड़ने के लिए ही किया जा रहा है। प्रोटोन तभी टूटेंगे, जब वे प्रकाशवेग से टकराते हैं। प्रोटोन की बनावट को लेकर अलग-अलग अब धारणाएं सामने आती रही हैं। सबसे विश्वसनीय माने जाते सिद्धांत के अनुसार प्रोटोन क्वार्क समूहों से मिलकर बना है। इन्ही क्वार्क समूहों को हेड्रोन नाम दिया गया है। यह हेड्रोन बोसोन कणों से बने हो सकते हैं। महान साइंसदान प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग कहते हैं कि पदार्थ के मूल में चार फेक्टर हैं। इस प्रयोग से हम केवल एक को जान सकेंगे। मैं इस बात के लिए १०० डालर की शर्त भी लगा सकता हूं कि इस प्रयोग में इतनी ऊर्जा नहीं पैदा की जा सकेगी हिग्स बोसान कण पैदा हो सके। प्रयोगकर्ता अभी बोसान कण नहीं पा सकेंगे।

प्रयोग का फायदा
प्रोटॉनों के टकराने से ब्रह्मांड के बनने के रहस्य खुलने का अनुमान है। वैज्ञानिक कहते हैं कि इस प्रयोग से यह रहस्य खुल सकता है कि आख़िर द्रव्य क्या है? और उनमें द्रव्यमान कहाँ से आता है? साथ ही हम जान पाएंगे कि गरुत्व बल कैसे पैदा होता है।

आशंकाएं निर्मूल
जर्मन रसायन शास्त्री प्रोफेसर ओट्टो रोसलर ने यह कहकर दुनिया में सनसनी मचा दी थी कि इस पर्योग को रोक देना चाहिए। इससे धरती के भीतर माइक्रो ब्लैक होल बन सकते हैं और ये पूरी धरती को निगल जाएंगे। आस्ट्रेलिया के साइंसदानों ने भी इसका समर्थन किया। पर प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग इसे प्रयोग से ऐसा कोई खतरा न होने की बात कह चुके हैं। ब्लैकहोल थ्योरी के जन्मदाता हॉकिंग के अनुसार माइक्रो ब्लैकहोल यदि बनते भी हैं तो भी तापमान इतना होगा कि ये पुनः वाष्पित होकर पदार्थ में बदल जाएंगे।

-सुधीर राघव
(अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें, साइंस से जुड़े विषयों पर समाज में बहस होनी ही चाहिए)

Tuesday, September 9, 2008

छोटे मुद्दे-छोटे नेता

महाराष्ट्र में भाषा का मुद्दा गरमा चुका है। पंजाब में भी सत्तारूढ़ दल चाहता है कि यह गरमा जाए। देश जब-जब विकास की दिशा में कोई ठोस फैसले लेता है, कुछ लोग धर्म, जाति और भाषा के मुद्दे खड़े कर देते हैं। राजीव गांधी जब युवा भारत का नारा लेकर आए, देश में दूर संचार क्रांति का सूत्रपात हुआ, मगर हवा चली हवाला और मंडल की। वीपी सिंह सत्ता में आए, उन्हें गिराकर चंद्र शेखर प्रधानमंत्री बने और नतीजा यह निकला कि देश आर्थिक संकट में डूबा। सोना तक गिरवी रखना पड़ा। देश को इस आर्थिक संकट से उबारा नरसिम्हाराव की सरकार ने। प्रगति की हवा चलती उससे पहले ही आडवाणी ने धर्म की ध्वजा थामकर पूरे देश में सांप्रदायिक दीवार खड़ी कर दी। एक नई तरह की नफरत समाज में पैदा हुई और राम के नाम पर कई जाने गईं। ढांचे तोड़े गए। इस सबके बाद भी आडवाणी प्रधानमंत्री नहीं बन सके।
प्रधानमंत्री बने अटल बिहारी वाजपेयी, वह भी तब जब उन्होंने माना कि जाति और धर्म के मुद्दे के सहारे देश में लोकप्रिय सरकार नहीं बनाई जा सकती। इसके लिए कुछ ठोस करना चाहिए, जो देश के विकास के लिए जरूरी है। इसलिए उन्होंने सरकार चलाते समय अपने सहयोगी भाजपा नेताओं और संघ मुख्यालय की कम तथा ब्रजेश मिश्र की बातों को अधिक गंभीरता से लिया। अटल बिहारी वजपेयी की तरह ही मायावती ने भी समझ लिया है कि जातिवाद के सहारे देश में सफल राजनीति नहीं की जा सकती। उन्होंने कांशी राम के अंतिम संस्कार के साथ ही उनकी नीतियों को भी अलविदा कह दिया। बसपा में ब्राह्मणों और अन्य जाती के नेताओं को प्रमुखता दी गई। नतीजा सबके सामने हैं। उन्होंने न सिर्फ उत्तर प्रदेश में सरकार बनाई, बल्कि उन्हें प्रधानमंत्री पद का अगल सशक्त दावेदार भी माना जा रहा है।
दूसरी ओर आडवाणी न तो वाजपेयी को मंत्र को समझ पाए और न ही उन्हें उस पर विश्वास हुआ। हां उसकी सफलता ने उन्हें एक बार जरूर प्रभावित किया और अपनी कट्टर छवि बदलने के लिए जिन्ना की मज़ार पर जाकर माफी मांग आए। इस पर वह टिके भी रहते तो भी उन्हें कुछ लाभ मिलता मगर उन्हें प्रधानमंत्री बनने की इतनी जल्दी है कि वे फिर से वही धर्म के पुराने मुद्दे पर आ गए हैं। वे फिर राम मंदिर का राग अलाप रहे हैं। एक बार लोग उन्हें परख चुके हैं। अब फिर विश्वास कर लेंगे ऐसा लगता नहीं है। अगर आडवाणी प्रधानमंत्री पद के दावेदार रहते हैं तो भाजपा शायद ही कोई करिश्मा कर पाये।
पंजाब में अकाली नेताओं और महाराष्ट्र में राज ठाकरे को आडवाणी के तौर-तरीकों से सबक लेना चाहिए। यह विवधताओं का देश है, यहां भाषा, जाति और धर्म के मुद्दे आपक को किसी एक जगह तो लोकप्रियता दिला सकते हैं मगर सफल राष्ट्रीय नेता नहीं बना सकते। अतः इन नेताओं को भी इस राष्ट्र के अनुरूप अपनी सोच विशाल करनी चाहिए।

Wednesday, September 3, 2008

नेताओं के भरोसे न छोड़ें मदद का काम

बिहार की बाढ़ बिफरी कोसी का नतीजा है। कोसी नदी हर साल उफनती है। अभिनेता मनोज वाजपेयी जो खुद इस इलाके से हैं, बेहद दुखी हैं। उन्होंने इस दुख का इजहार अपने ब्लाग में किया है। बिहार के चंपारण जिले के बेलवा गांव में जन्मे मनोज ने लिखा, 'जब से मैंने होश संभाला है नेपाल से आने वाली इस नदी की समस्या को सुनता आ रहा हूं। आज तक इसका कोई निदान नहीं ढूंढा जा सका। सरकारें आई और गईं। मौत और दुख का सिलसिला जारी है। समझ नहीं आता कि बेबस लोग अपनी पीड़ा किससे कहें।'
अतः जाहिर है कि बिहार का बाढ़ प्रबंधन वहां के राजनेताओं के भरोसे नहीं छोडा़ जा सकता है। जो मदद बाहर से आ रही है, वह भी सही लोगों तक पहुंचेगी, इसमें भी शक है। दंबंगों द्वारा राहत सामग्री हथियाए जाने की खबरें भी खूब इलेक्ट्रानिक मीडिया पर चलीं। जहां देश-विदेश में बाढ़ पीडि़तों के लिए मानवता के आधार पर राहत के हाथ बढ़ रहे हैं, वहीं स्थानीय लोगों का दबंगई के नाम पर ऐसी प्रवृति दिखाना शर्मनाक है। यहां तक भूखों और सताए गए लोगों के पेट पर लात मार कर लूटने में वहां के राजनेता तक बदनाम रहे हैं। ऐसे में कुछ निजी संगठन ही वहां जाकर कोसी के तटों को बांधने का कोई खाका तैयार कर काम करें तभी भला हो सकता है। ऐसे में धार्मिक संगठनों को भी आगे बढ़कर लोगों की मदद के लिए पहुंचना चाहिए। धर्म गुरुओं के साथ जो जनबल है, उन्हें उसका उपयोग पीडि़तों को मदद पहुचाने में करना चाहिए। सिर्फ प्रवचन करके देश या समाज का भला नहीं हो सकता। यह समाज के लिए कुछ करने का मौका है, जिसके लिए रोज भीड़ जुटा कर प्रवचन दिए जाते हैं। जो हाथ जयजयकार करने के लिए उठ सकते हैं, वे मदद के लिए भी आगे बढ़ने चाहिए।

सबको बधाई

आज गणेष चतुर्थी की सबको बधाई। गणपति को विघ्न हरण सुख दाता कहा गया है। वह ऋद्धि-सिद्धि के दायक भी माने गए हैं। भाद्र शुल्क चतुर्थी को गणेशजी का व्रत-पूजन होता है। हालांकि इस दिन का एक और महत्व भी हमारी दंतकथाओं में मिलता है। कहा जाता है कि श्री कृष्ण भगवान को इस दिन चन्द्रमा का दर्शन करने से मणि की चोरी का कलंक लगा था। अत: इस दिन चन्द्रदर्शन वर्जित है।

Tuesday, September 2, 2008

कोकीन का बड़ा कॉकस

सोहणी सिटी में कोकीन का धंधा तेजी से फल-फूल रहा है। मोहाली पुलिस एक हफ्ते में दो बड़ी धरपकड़ कर चुकी है। और तो और इसमें कई पुलिस वाले भी लिप्त पाए गए हैं। पूरी दुनिया यह जानती है कि अफगानिस्तान में हो रही कोकीन की पैदावार अपने लिए सरहद लांघ कर बाजार खोज रही है। पाकिस्तान से होती हुई यह राजस्थान और पंजाब के बॉर्डर से भारत पहुंच रही है। तस्करी का इतना बड़ा जाल बिना वर्दीधारियों की मिलीभगत के संभव नहीं है। चंडीगढ़ के कुछ डांस क्लब, कालेज और बार में यह सप्लाई हो रही है। आखिर प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से चंडीगढ़ देश का दूसरा बड़ा अमीर शहर है। इसलिए यह तस्करों की नजर पर चढ़ा है। मोहाली पुलिस जो कुछ कर रही है वह अच्छा प्रयास है। यूटी पुलिस और हरियाणा पुलिस को भी जागना चाहिए। उसका दामन दागदार हो रहा है।